छिंंन्दवाड़ा महापौल नोटिस से सीखा सबक , अब मेयर नोटिस से पहले सरकार लागाएगी केविएट

भोपाल। छिंदवाड़ा नगर निगम की महापौर कांता योगेश सदारंग को हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत से सबक लेकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने ग्वालियर और रीवा के महापौर को कारण बताओ नोटिस जारी करने के पहले हाईकोर्ट में केविएट लगाने का निर्णय लिया है। जिससे ग्वालियर और रीवा के महापौर नोटिस मिलते ही हाई कोर्ट में अंतरिम राहत के लिए याचिका दायर ना कर सकें।
ग्वालियर नगर निगम के महापौर विवेक शेजवलकर पर जांच रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि संस्थानों के साथ ही व्यक्तिगत तौर पर भी नगर निगम मद से अनुदान बांटा गया इस मामले में जांच दल ने नगर निगम ग्वालियर के भारतीय प्रशासनिक सेवा के मौजूदा एक कमिश्नर और तत्कालीन दो कमिश्नरों को भी दोषी पाया है। इसके अलावा और भी कई आर्थिक गड़बड़ियों के मामले में जांच दल ने दोषी पाया है। ऐसे ही मामले में तत्कालीन नगर निगम कमिश्नर और ओड़ीसा कैडर के आईएएस आर. एस. राजपूत, विनोद शर्मा, वेद प्रकाश एवं तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ नगरीय प्रशासन विभाग ने ग्वालियर के पुलिस थाने में एफआईआर कुछ साल पहले दर्ज करवा चुका है। इधर रीवा नगर निगम की महापौर ममता गुप्ता के द्वारा निर्माण कार्यों सहित कुछ और मामले में अल्पकालीन निविदा बुलाकर ठेकेदारों को काम दिया गया और सामान की खरीदी की गई। जबकि आकस्मिक स्थिति में ही अल्पकालीन निविदा बुलाने का प्रावधान है। इस मामले में रीवा की महापौर ममता गुप्ता के साथ ही पूर्व कमिश्नर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कर्मवीर सिंह और वर्तमान कमिश्नर आरपी सिंह को भी जांच दल ने दोषी पाया है।