पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग

 

GSझारखंड पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने पेट्रोल और डीजल को भी जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की है। अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि कुछ पेट्रोलियम उत्पादों को इसके दायरे में लाया जा चुका है। इसमें लुब्रिकेंट सहित अन्य शामिल हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल को भी दायरे में लाया जाना चाहिए। इससे एक मूल्य व्यवस्था पूरे देश में लागू हो जाएगा। सभी को हर तरह से सहूलियत होगी। इसका अधिक लाभ आम जनता को मिलेगा। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर सबसे अधिक राजस्व केंद्र और राज्य सरकार को मिलता है। डीजल में 58 प्रतिशत तक टैक्स है। पेट्रोल में प्रति लीटर 36 रुपये टैक्स लिया जा रहा है। जीएसटी में अधिकतम 28 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान है। अधिकतम के दायरे में पेट्रोलियम पदार्थ को रखने के बाद भी आम जनों के लिए यह काफी सस्ता हो जाएगा। सरकार को बिना देर करते हुए इसे जीएसटी में ले आना चाहिए। वाणिज्यकर विभाग के प्रमंडल और अंचल कार्यालय में 10 जुलाई से ट्रेनिंग शुरू हो रही है। सचिव केके खंडेलवाल ने बताया कि यह कार्यालय परिसर स्थित कांफ्रेंस हॉल में शाम तीन बजे से 6.30 बजे तक चलेगा। विशेषज्ञों द्वारा जीएसटी के प्रावधान, लाभ के बारे में जानकारी दी जाएगी। व्यापारी, सीए से लेकर हर वर्ग के लोग यहां जा सकते हैं। जीएसटी को लेकर किसी भी तरह की समस्या का निराकरण पा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही सरल कर प्रणाली है। थोड़ा समझने की जरूरत है।

 
पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग  
 
 

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