शिवराज की राह चले कमलनाथ , 25को करेंगे मंथन नाम दिया ” मिनिस्टर्स ओरिएंटेशन”

भोपाल। कमलनाथ सरकार मंत्रियों और अफसरों के बीच तालमेल बिठाने और कामकाज की दिशा तय करने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तर्ज पर मंत्रियों और अफसरों का मंथन करने जा रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान में 25 फरवरी को होने वाले इस मंथन को नाम दिया गया है- मिनिस्टर्स ओरिएंटेशन। नवगठित गुड गवर्नेंस कन्सल्टेटिव काउंसिल (सुशासन परामर्शदात्री परिषद) का यह पहला आयोजन होगा, जिसमें सभी मंत्री और आला अफसर शामिल होंगे। सरकार गठन के बाद बीते डेढ़ महीने में मुख्यमंत्री तक यह फीडबैक पहुंचा है कि उनकी कैबिनेट के ज्यादातर मंत्री नए होने के कारण कामकाज में उन्हें दिक्कत आ रही है। कई मंत्रियों और अफसरों के बीच तालमेल का अभाव है। वचनपत्र के बिंदुओं पर अमल को लेकर अलग-अलग विचार मंत्री और अफसर के सामने आ रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने मिनिस्टर्स ओरिएंटेशन का निर्णय लिया। इसकी रुपरेखा तय करने की जिम्मेदारी अटलबिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के महानिदेशक और पूर्व मुख्य सचिव आर. परशुराम को सौंपी है। इस दौरान कर्जमाफी सहित अब तक पूरे हुए वचनों का हवाला देकर बताया जाएगी कि किस तरह सरकार की मंशा के मुताबिक काम किया जा सकता है।
कमलनाथ सरकार का यह प्रशासनिक मंथन उनके पहले मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान के समय हुए तीन मंथन जैसा ही होगा, लेकिन इसे अलग रुप देने की तैयारी की जा रही है। इसमें विभागाध्यक्ष स्तर तक के अफसरों से सुझाव लेने के बजाए अफसरों को सरकार की मंशा बताई जाएगी। 27 फरवरी को सुशासन स्कूल में होने वाले इस आयोजन में मंत्रियों के साथ अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अफसरों और विभागाध्यक्षों को भी बुलाया जा सकता है। इनके उन्मुखीकरण के लिए आईआईएम जैसी संस्थाओं के विशेषज्ञ को बुलाने पर भी विचार हो रहा है।
शिवराज भी कर चुके हैं मंथन :शिवराज सरकार के दौरान जनवरी 2009 में पचमढ़ी में मंत्रियों के लिए आईआईएम के विशेषज्ञों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ था। इसके अलावा मंत्रियों और अफसरों के साथ तीन बार दो दिवसीय मंथन कर अनुशंसाएं निकाली गई थीं। ये मंथन साल 2007, 2009 और 2014 में हुए थे।