हिना कांवरे बनीं पहली महिला डिप्टी स्पीकर

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा ने आज जोरदार हंगामे के बीच अपना उपाध्यक्ष चुन लिया है। कांग्रेस की आदिवासी विधायक हिना कांवरे विधानसभा की पहला महिला डिप्टी स्पीकर बनी हैं। इस चुनाव में भी ठीक उसी तरह का हंगामा हुआ जैसा दो दिन पहले अध्यक्ष के निर्वाचन के दौरान हुआ था। खास बात यह है कि कांवरे के उपाध्यक्ष बनने के साथ सदन में बीते 29 बरस से चली आ रही विपक्ष के उपाध्यक्ष की परंपरा भी टूट गई और अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों सत्तापक्ष के चुने गए हैं। कांवरे के मुकाबले भाजपा से दलित विधायक और पूर्व मंत्री जगदीश देवड़ा उम्मीदवार थे।
उपाध्यक्ष के चुनाव में गुप्त मतदान कराने और कांग्रेस के प्रस्ताव के साथ अपना प्रस्ताव भी लेने की मांग को लेकर भाजपा ने आज आसंदी के सामने पहुंच कर जमकर हंगामा और नारेबाजी की। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित भी करनी पड़ी, लेकिन तीसरी बार कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष ने संख्याबल के आधार पर प्रस्ताव के समर्थन में हां की जीत के आधार पर हिना कांवरे को उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित घोषित कर दिया। इसके बाद एक बार फिर सदन शोर-शराबे में डूब गया और तीसरी बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इससे पहले विधानसभा में आज उपाध्यक्ष के निर्वाचन की प्रक्रिया शुरू होते ही अध्यक्ष एन.पी. प्रजापति ने कार्यसूची में शामिल पांच प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम चार प्रस्ताव कांग्रेस सदस्य हिना कांवरे के निर्वाचन संबंधी हैं, एक प्रस्ताव भाजपा के जगदीश देवड़ा का है। अध्यक्ष ने इनमें से पांचीलाल मेड़ा के पहले प्रस्ताव को पढ़ने की अनुमति दी तो विपक्ष ने मांग रखी कि पांचों प्रस्ताव एक साथ पढ़े जाएं। शोर शराबे के बीच मेड़ा ने अपना प्रस्ताव पढ़ा कि हिना कांवरे को विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना जाए। संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने प्रस्ताव का समर्थन किया। विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत विपक्षी सदस्य जगदीश देवड़ा को उपाध्यक्ष चुने जाने संबंधी गोपाल भार्गव का प्रस्ताव भी इसमें शामिल करने की मांग को लेकर जोर-जोर से बोलने लगे। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा ने भी इस पर आपत्ति जताई। अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि वे आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोक-झोंक जारी रही। इस बीच विपक्ष ने उपाध्यक्ष के लिए मत विभाजन गुप्त मतदान पद्धति से कराने की मांग रख दी और हंगामा करते हुए आसंदी के सामने तक पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के बर्ताव को अनुचित बताते हुए कहा कि उनकी बात भी सुनी जाएगी, लेकिन हंगामा चलता रहा तो सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी गई थी। हंगामे का यह क्रम निर्वाचन पूरा होने तक चला।
नेता प्रतिपक्ष ने अध्यक्ष पर लगाए आरोप
विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने इस दौरान अध्यक्ष पर पक्षपात के आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि पहले दिन से विपक्ष को दबाने की कोशिश हो रही है। इस बीच शिवराज सिंह चौहान ने आसंदी को लेकर एक टिप्पणी कर दी, जिस पर सत्ता पक्ष ने तीखा एतराज जताया तो अध्यक्ष ने उसे कार्यवाही से निकाल दिया।