29 साल बाद विपक्ष का नहीं होगा डिप्टी स्पीकर!

अब उपाध्यक्ष के लिए हिना और देवड़ा के बीच मुकाबला

भोपाल। सर्वानुमति से विधानसभा अध्यक्ष के निर्वाचन की सालों पुरानी परंपरा को तोड़ने का खामियाजा भाजपा को उपाध्यक्ष का पद गंवा कर भुगतना पड़ सकता है। 29 साल बाद ऐसा अवसर आया है कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद सत्ताधारी दल के पास होंगे। उपाध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस ने आदिवासी महिला विधायक हिना कांवरे का नामांकन दाखिल कर दिया है। वहीं भाजपा ने भी दलित विधायक और पूर्व मंत्री जगदीश देवड़ा को विपक्ष के उम्मीदवार के तौर पर उतारा है।
विधानसभा उपाध्यक्ष पद के लिए कल निर्वाचन होना है और संख्याबल के हिसाब से कमजोर विपक्ष ने आज फिर इस पद के लिए नामांकन दाखिल कर चौंका दिया है। मंगलवार को सदन में भाजपा के बहिष्कार के बीच अध्यक्ष के चुनाव में सत्तापक्ष के उम्मीदवार को 120 विधायकों के वोट मिले थे। जो विपक्ष के संख्याबल 109 से कही ज्यादा थे। यही स्थिति उपाध्यक्ष निर्वाचन में भी रहने के आसार हैं। सदन में कांग्रेस के अपनी ताकत के प्रदर्शन के एक दिन बाद ही विपक्ष द्वारा फिर उसकी शक्ति को परखने की कोशिश भाजपा करती दिख रही है। यह और बात है कि चारों निर्दलीय विधायकों समेत बसपा के दो और सपा के एक विधायक ने भी अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार एन.पी. प्रजापति को वोट देकर अपनी प्रतिबद्धता जताई थी।
पटवा काल से चल रही थी परंपरा
1990 में भाजपा की सरकार बनने के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा ने विधानसभा उपाध्यक्ष का पद विपक्ष को दिया था और कांग्रेस के श्रीनिवास तिवारी को सर्वानुमति से उपाध्यक्ष चुना गया था। तब से यह परंपरा कायम थी और विपक्ष के भेरुलाल पाटीदार, ईश्वरदास रोहाणी, हजारीलाल रघुवंशी, हरवंश सिंह और डॉ राजेंद्र कुमार सिंह उपाध्यक्ष रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने दिए थे संकेत
पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के फ्लोर मैनेजमेंट का जिम्मा संभाल रहे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कल ही मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया था कि भाजपा ने सुंदरलाल पटवा के समय से चली आ रही परंपरा तोड़ी है इसलिए अब कांग्रेस भी उपाध्यक्ष पद भी अपने पास रखेगी। सूत्रों के अनुसार उनकी ही सलाह पर कांग्रेस ने हिना कांवरे का नामांकन कराया है।
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हार्स ट्रेडिंग के आरोपों से घिरी है भाजपा
दिग्विजय सिंह के आरोप के बाद कांग्रेस के कुछ विधायकों ने भी खुल कर कहा है कि भाजपा ने उन्हें खरीदने और प्रलोभन देने की कोशिश की है। अध्यक्ष निर्वाचन के दौरान भाजपा द्वारा गुप्त मतदान की मांग को भी इसी आरोप से जोड़कर देखा जा रहा है।