NPA: बड़े धोखे से बचने को बैंक देंगे छोटे लोन

नई दिल्ली 
एनपीए मामलों के निपटारे के लिए सरकारी बैंकों को दिए गए टारगेट में कुछ नरमी बरती जा सकती है। साथ ही बैंकों को लोन देने पर ज्यादा फोकस रखने को कहा जाएगा। इसे लेकर 15 सितंबर को वित्त मंत्रालय और आरबीआई की मीटिंग होने जा रही है। इसमें सरकारी बैंकों के प्रमुखों को भी बुलाया गया है। बैठक में एनपीए निपटारे की समीक्षा के साथ ही बैंक पूंजी की जरूरतों पर भी रिपोर्ट जारी की जाएगी। इसके अलावा बढ़ते एनपीए के कारण जिन सरकारी बैंकों पर लोन देने को लेकर प्रतिबंध लगा है, उसे खत्म किया जा सकता है।  
 

सूत्रों के अनुसार, सरकारी बैंकों का एनपीए अब 8 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया है। ऐसे में बैंकों को उनके एनपीए को देखते हुए उसे कम करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके चलते बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ यानी लोन देने की रफ्तार में कमी आ रही है। इससे आय भी कम होने की आशंका है। ऐसे में सरकार को लग रहा है कि कहीं एक मर्ज को सही करने के चक्कर में दूसरी बीमारी न खड़ी हो जाए। यही कारण है कि अब वह बैलेंस अप्रोच रखकर चलना चाहती है। 

वित्त मंत्रालय के उच्चाधिकारियों का कहना है कि मीटिंग को लेकर जो अजेंडा तय किया गया है, उसमें एनपीए को लेकर उन लोगों और कंपनियों को राहत देना शामिल है, जो वित्तीय कारणों से लोन नहीं दे पाए और निश्चित अवधि या फिर एकमुश्त लोन देने को तैयार हैं। ऐसे लोगों और कंपनियों को बैंक अपने विवेक के अनुसार समय दे सकते हैं। ऐसे में बैंकों के लिए एनपीए कम करने के टारगेट में बदलाव करना या राहत देना जरूरी है। इसके अलावा सरकार का ध्यान अब बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ पर भी है। इस वक्त क्रेडिट ग्रोथ 8 से 9 प्रतिशत है। सरकार इसे बढ़ाकर 15 से 20 फीसदी करना चाहती है। इसके लिए सरकारी बैंकों से कहा जाएगा कि वे छोटे लोन पर ज्यादा फोकस करें। बड़े लोन के एनपीए को लेकर बेशक ज्यादा सतर्कता बरती जाए, मगर छोटे लोन को लेकर कुछ रिस्क लिया जा सकता है।