May 23, 2020

इम्यूनिटी के साथ आत्मबल को भी बढ़ाएं



इम्यूनिटी के साथ आत्मबल को भी बढ़ाएं


अपने सुखद जीवन को समझे, आनंद की अनुभूति करें , स्वयं के भीतर जाएं- राज्य आनंद संस्थान नि:शुल्क सिखा रहा ऑनलाइन अल्पविराम 


भोपाल : शनिवार, मई 23, 2020, 14:52 IST

कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन में प्रदेश  के नागरिकों को उत्साह, आनंद की अनुभूति कराने और स्वयं से जुडाव के लिए  राज्य आनंद संस्थान के लोकप्रिय अल्पविराम कार्यक्रम के ऑनलाइन प्रशिक्षण  का प्रतिदिन आयोजन किया जा रहा है।

राज्य आनंद संस्थान  के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री  अखिलेश अर्गल  ने बताया कि कोरोना के इस संकट काल के दौरान नागरिकों  में फैले भय और  अवसाद को दूर करने के लिए संस्थान ऑनलाईन अल्पविराम कार्यक्रम 4 मई से संचालित कर रहा है। 

इस कार्यक्रम में 40 प्रतिभागी ऑनलाइन जुड़ सकते है। इससे स्वयं के जीवन के प्रति जागरूकता,  जीवन का लेखा-जोखा ,किसने हमारी मदद की, हमने किसकी मदद की, मेरे जीवन के लक्ष्य आदि मुद्दों पर बात की जाती है। श्री अर्गल ने बताया कि पिछले  60 दिनों से कोरोना माहामारी से बचाव के लिए हम सभी अपने-अपने घरों में हैं । बाहर के इस संकट से बचने का सबसे सही उपाय यही है कि  हम स्वयं को घर के अंदर रखें, सोशल डिस्टेंसिग का पालन करें, भीड़ नहीं  लगाए और भीड़ हो ऐसी जगह पर नहीं जाएं। जब हम बाहर नहीं जा पा रह हों तो क्यों ना अपने स्वयं के अंदर जाएं,  स्वयं के जीवन के भीतर उतरें। अपनी अंतरात्मा से बातचीत  करें, स्वयं को समय दें। 

संस्थान के द्वारा  04 मई से प्रतिदिन 40 लोग का पंजीयन कर एक समूह बनाया जा रहा है, जिसमें अगले छ: दिनों  तक लगातार अल्पविराम के सत्रो का ऑनलाइन अभ्यास कराया जा रहा है। राज्य  आनंद संस्थान के प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स द्वारा ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से यह अभ्यास कराया जा रहा है। अब तक इस प्रकार के 15 कोर्सों में प्रतिभागियों का  पंजीयन किया गया है। जिससे  450 से अधिक लोगों ने लाभ उठाया है।

यह प्रक्रिया और कार्यक्रम निरंतर जारी  है। कोई भी व्यक्ति राज्य  आनंद संस्थान की बेवसाईट www.anandsansthanmp.in पर जाकर आनंद शिविर  टैब को क्लिक  कर अपना पंजीयन निशुल्क  करा सकता है। इस सम्बन्ध में अधिक सहायता के लिए फोन(7723929667) पर संपर्क भी कर  सकते है। संस्थान के मुख्य  कार्यपालन अधिकारी ने नागरिकों  से अपील की है कि इस कार्यक्रम से जुड़ें। इस अभ्यास को करने से आप अपने आंतरिक आनंद को पहचानने में सक्षम  हो पायेंगे। जीवन को समझने के नजरिए में  बदलाव आएगा जो निश्चित रूप से  आपके आनंद को बड़ा सकेगा।


महेश दुबे



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