केन्द्र सरकार से की गई छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना की तारीफ, समिति ने दिए ये महत्पवपूर्ण सुझाव

केन्द्र सरकार से की गई छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना की तारीफ.

केन्द्र सरकार से की गई छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना की तारीफ.

लोकसभा में कृषि मामलों की स्थायी समिति ने सदन में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में गोधन न्याय योजना की तारीफ की है. समिति ने छत्तीसगढ़ सरकार की इस योजना पर केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि किसानों से मवेशियों के गोबर खरीद की ऐसी ही योजना पूरे देश के लिए शुरू की जानी चाहिए.

रायपुर. लोकसभा (Lok Sabha) में कृषि मामलों की स्थायी समिति ने सदन में प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में गोधन न्याय योजना (Godhan Nyay Yojana) की तारीफ की है. समिति ने छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh government) की इस योजना पर केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि किसानों से मवेशियों के गोबर खरीद की ऐसी ही योजना पूरे देश के लिए शुरू की जानी चाहिए. पर्वतागौड़ा चंदनगौड़ा गद्दीगौडर की अध्यक्षता वाली लोकसभा की कृषि मामलों की स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को इस संदर्भ में पूरी रिपोर्ट सौंपी है.

समिति ने अपने सुझाव में कहा है कि किसानों से उनके मवेशियों का गोबर खरीदने से उनकी आय में बढ़ोत्तरी होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे. जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा. इसके साथ ही आवारा मवेशियों की समस्या का भी समाधान होगा. लोकसभा में रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पूर्व यह समिति केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों को भी ऐसा ही सुझाव दे चुकी है.

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 20 जुलाई 2020 से छत्तीसगढ़ में गोबर को गोधन बनाने की दिशा में कदम उठाते हुये गोधन न्याय योजना लागू की. जिसमें पशु पालकों से गोबर क्रय करके गोठानों में वर्मीकंपोस्ट और अन्य उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना का संचालन सुराजी गांव योजना के तहत गांव-गांव में निर्मित गौठानों के माध्यम से हो रहा है. इन गोठानों में पशुओं के चारे और स्वास्थ्य की देखभाल के साथ रोजगार परक कार्य किये जा रहे हैं. इन्हीं गोठानों में गोधन न्याय योजना के तहत वर्मी कंपोस्ट टांकों का निर्माण किया गया है, जिनमें स्व सहायता समूहों की महिलाएं जैविक खाद का निर्माण कर रही हैं.

गोबर बेचकर पशुपालक कमा रहे मुनाफागोबर की खरीद गोठान समितियों के माध्यम से 2 रुपए किलो की दर से की जा रही है. अब तक गोबर विक्रेता किसानों, पशुपालकों और संग्राहकों को 80 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है. स्व सहायता समूहों द्वारा अब तक 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है. वर्तमान में 7 हजार 841 स्व-सहायता समूह गोठान की गतिविधि संचालित कर रहे हैं. इन समूहों के लगभग 60 हजार सदस्यों को वर्मी खाद उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, गोबर दिया निर्माण के साथ विभिन्न गतिविधियों से 942 लाख की आय प्राप्त हो रही है. गोठान योजना के लिये वर्ष 2021-22 के बजट में 175 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. स्व सहायता समूहों द्वारा निर्मित जैविक खाद के विक्रय के लिए छत्तीसगढ़ में 10 रुपए प्रति किलो की दर तय की गई है.







Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here