तय मियाद में कुल 6 फर्म ने टेंडर पार्टिसिपेट किया था. (सांकेतिक फोटो)
कोरोना वायरस (COVID-19) की जांच में तेजी लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने 75000 रैपिड टेस्ट किट खरीदी के लिए टेंडर जारी किया था.
जानकार और सूत्रों की मानें तो इसके पीछे का खेल कुछ और ही था. खेल नहीं जमने के कारण टेंडर ही निरस्त करना पड़ा. बहरहाल, जिस खेल का जनकार जिक्र कर रहे हैं उसकी आमतौर पर चर्चा होने लगी है. टेंडर निरस्त करने के बाद दोबारा टेंडर की पूरी प्रक्रिया और खरीदी में कम से कम 10 दिनों का वक्त लगेगा. कोरोना के इस भयानक संकटकाल में एक-एक पल कठिन है, ऐसे में कम से कम 10 दिनों की देरी काफी भारी पड़ सकती है.
अब तक करीब 77000 लोगों होम क्वारेंटाइन
राज्य सरकार के आकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 77000 लोगों को होम क्वारेंटाइन किया गया, जिन पर पल-पल नजर रखी जा रही है. इसके अलावा रेड जोन, हॉट स्पॉट वाले स्थानों पर त्वरित और वृहद जांच के लिए रैपिड टेस्ट किट की खरीदी की जानी थी. मगर करीब एक सप्ताह के जद्दोजहद के बाद किट खरीदी का टेंडर ही निरस्त कर दिया. बात अगर आकड़ों की करें तो अब तक महज चार हजार संदिग्धों की जांच की गई है. जबकि 01 मार्च के बाद विदेशों से लौटने वाले यात्रियों की ही संख्या तीन हजार के करीब है. ऐसे में जो लोग होम क्वारेंटाइन पर हैं उनकी जांच, रेड जोन में त्वरित जांच कैसे होगी यह बड़ा सवाल बना हुआ है. इससे सीधेतौर पर रहा जा रहा है जांच में जितनी देरी होगी स्थिति उतनी ही भयाव होगी.
रद्द किया गया टेंडर.
आज से तीन स्थानों पर कोरोना जांच
28 जिला, 05 संभाग, 13 नगर निगम वाले राज्य छत्तीसगढ़ में आज से पहले तक महज दो स्थानों पर ही कोरोना जांच की व्यवस्था थी. सोमवार से रायपुर मेडिकल कॉलेज में भी जांच शुरू की गई, जिसे मिलाकर अभ महज तीन स्थानों पर ही जांच हो रही है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि जांच की इस सुस्त रफ्तार से नुकसान कैसे नहीं होगा. क्या हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी लचर है कि कम से कम प्रत्येक संभाग मुख्यालय में ही जांच की व्यवस्था नहीं कर सकती?
सप्लाई से इंकार करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
रैपिड जांच किट के लिए जिन तीन फर्मों का वैध पाया गया था उनमें 1. Chhattisgarh Distributors pvt.ltd, 2. Kansal Medical Systems Private Limited और 3. Mahendra Enterprices शामिल थे. अब दलील यह दी जा रही है कि इन फर्मों के द्वारा सप्लाई से इंकार कर दिया गया. तो एसे में सवाल यह उठता है कि जब पूरे देश में आपदा प्रबंधन एक्ट 2005 लागू है. केंद्र सरकार ने इसे गंभीर चिकित्सा स्थिति / महामारी के तौर पर ‘अधिसूचित आपदा’ के रूप में शामिल किया है, तो फिर इन फर्मों के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है?
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First published: April 13, 2020, 5:15 PM IST


