कोरोना फाइटर ने कहा- ऑनलाइन नफरत फैलाने से ज्यादा आसान कोरोना से जंग – Corona virus survivor chhatisgarh raipur aiims london doctor

  • कहा- संक्रमण के दर्द, कलंक से भी लड़ना पड़ रहा
  • ठीक होने लगी तो पड़ोसियों को हुआ गलती का एहसास

कोरोना वायरस की बीमारी को लेकर भय का माहौल बन रहा है. कोरोना से पीड़ित मरीजों को अजीब नजर से देखा जा रहा है. छत्तीसगढ़ में अस्पताल से पूरी तरह ठीक होकर घर लौटी कोरोना फाइटर ने आजतक से बात करते हुए कोरोना वायरस से फाइट की तुलना में ऑनलाइन नफरत फैलाने वालों से संघर्ष को कठिन बताया. उन्होंने कहा कि यह बस एक वायरस है, दुनिया का अंत नहीं.

कोरोना फाइटर ने पीड़ितों को संदेश दिया कि आपको बस डॉक्टरों पर भरोसा करते हुए इस वायरस से लड़ना है. जिन लोगों को यह बीमारी नहीं है, वे लोग भाग्यशाली हैं. मरीजों के प्रति संवेदनशील बनें और ना भी बन सकें, तो कम से कम उन्हें बदनाम न करें. शर्म का एहसास न कराएं. छत्तीसगढ़ की पहली कोरोना पॉजिटिव मरीज 15 मार्च को लंदन से रायपुर लौटी थी. उन्होंने 17 मार्च को कोरोना टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट 19 मार्च को पॉजिटिव आई थी.

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उन्होंने कहा कि कोरोना के मरीजों को न केवल संक्रमण के दर्द से, बल्कि इसके कलंक से भी लड़ना पड़ रहा है. कोरोना से जंग ऑनलाइन हेटर्ड से लड़ने की अपेक्षा आसान है. युवती ने अपना दर्द बयान करते हुए कहा कि स्वदेश लौटने के बाद एयरपोर्ट पर भी उनकी स्कैनिंग हुई थी.

इसके बाद उन्होंने खुद को होम क्वारनटीन कर लिया था. यह अनिवार्य भी था. उन्होंने कहा कि घर में माता-पिता के अलावा बुजुर्ग दादा-दादी भी हैं, इसलिए 17 मार्च को कोरोना टेस्ट कराने खुद ही एम्स पहुंची. कोई भी लक्षण न होने के कारण डॉक्टर मेरी जांच नहीं कर रहे थे. जैसे-तैसे लगभग तीन घंटे बाद टेस्ट हुआ और 19 मार्च को रिपोर्ट पॉजिटिव आई.

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कोरोना से जंग जीतकर घर लौटी युवती ने कहा कि रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही स्थानीय चैनलों के सुर बदल गए. तुरंत ही कनिका कपूर की तरह जानकारी छिपाने के आरोप लगाए जाने लगे. सोशल मीडिया पर भी मुझे गैर जिम्मेदार बता बदनाम किया गया. कोरोना फाइटर ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसे पोस्ट भी किए कि हमारा पूरा परिवार लंदन से वापस आया है और हमने डॉक्टरों से परीक्षण नहीं कराया. अन्य लोगों का जीवन भी खतरे में डाल दिया है. उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर भी हमारा परीक्षण करने को तैयार नहीं थे, लेकिन हमने जिद करके कराया.

रायपुर के एम्स में 15 दिन तक इलाज कराने के बाद पूरी तरह ठीक होकर तीन अप्रैल को घर लौटी कोरोना फाइटर ने कहा कि पूरे परिवार की भी जांच हुई थी, लेकिन सबकी रिपोर्ट नेगेटिव आई. हमने कभी कुछ नहीं छिपाया. कभी किसी की भी जान को जोखिम में नहीं डाला. उन्होंने अस्पताल से आने पर पड़ोसियों की ओर से किए गए भव्य स्वागत को सुखद बताया और कहा कि मेरा परिवार भी समाज में कलंकित था. रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी उनपर विश्वास करने को कोई तैयार नहीं था. ऐसे लोगों के खिलाफ संघर्ष करने के लिए सोशल मीडिया पर ‘आई एम ए कोरोना फाइटर’ नाम से एक पेज बनाया.

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उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे ठीक होने लगी, हमारे आसपास और सोशल मीडिया पर भी लोगों को अपनी गलती का एहसास होने लगा. घर लौटने पर पड़ोसियों ने जिस तरह से स्वागत किया, उसे देखकर मैं स्तब्ध रह गई. गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अभी कोरोना के आधा दर्जन से अधिक एक्टिव मामले हैं, जबकि चार मरीजों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

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