कोरोना संकट के बीच कुछ अलग तस्वीर, पिला सोना बिनते बच्चे दे रहे हैं ऐसा संदेश, In the midst of the Corona crisis a different picture children picking mahua giving a positive message | rajnandgaon – News in Hindi

कोरोना संकट के बीच कुछ अलग तस्वीर, 'पीला सोना' बीनते बच्चे दे रहे हैं ऐसा संदेश

ग्रामीण सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रख रहे हैं.

कोरोना संकट के बीच छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धुर नक्सल (Natalie) इलाके की ये खूबसूरत तस्वीर आपको नई उम्मीद और ऊर्जा से भर देगी.

राजनांदगांव. पूरी दुनिया कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से परेशान है. लाखों लोग इस संक्रमण की चपेट में हैं. कई लोगों की जान भी जा चुकी है. इन सबके बीच छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के धुर नक्सल इलाके की ये खूबसूरत तस्वीर आपको नई उम्मीद और ऊर्जा से भर देगी. राजनांदगांव जिले के अंदरूनी इलाकों में ग्रामीण महुआ एकत्र कर रहे हैं. अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की कवायद इन ग्रामीणों ने शुरू कर ली है.

टोकनी के खजाने में छिपा महुआ, चार, तेंदू और खट्टी मीठी इमली,पहाड़ों पर कुदरत की मेहरबानी, महकते फल-फूलों राजनांदगांव जिले के नक्सल प्रभावित दूरस्थ ग्राम हलोरा की यह तस्वीर आपका दिल जीत लेगी. लॉकडाउन के बीच यहां महिलाएं लघुवनोपज संग्रहित कर रही हैं. बुजुर्ग और बच्चों की ये मनोरम तस्वीर लॉकडाउन के समय सुकून देने वाली है.

वनोपज है आजीविका का मुख्य साधन

जिले के अंदरूनी इलाकों में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखेत हुए गांव की महिलाएं लघु वनोपज संग्रहित कर रही हैं. ये उनके आजीविका का प्रमुख आधार है. इस वनोपज को बेचकर आमदनी एकत्रित कर  जीवन स्तर उन्नत कर रहे हैं. पहाड़ियों की गोद में छिपी इस मनोरम दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है कि ग्रामीण अंचलों में कोरोना जैसे गंभीर बीमारी को मात देकर लोग सुकून से अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं. हलोरा गांव की सिमा मिस्त्री कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लॉकडाउन का पूरी तरीके से पालन किया जा रहा है. लोग इसमें पूरा सहयोग भी कर रहे हैं जो एक अच्छी पहल है.

राजनांदगांव का यह हलोरा गांव धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण यहां रोजगार के साधन नहीं हैं. साथ ही लोगों की आजीविका का साधन वन उपज ही है. इस इलाके में लोगों का घर का चूल्हा भी इसी से चलता है. राजनांदगांव जिले के दूरस्थ वनांचल में ग्रामीण महिलाएं बुजुर्ग और युवा महुआ फिलहाल इस समय महुआ संग्रहण कर रहे हैं. साथ ही तेंदू और छार का संगठन भी इन ग्रामीणों द्वारा किया जाता है. इनकी आजीविका का साधन भी यही माना जाता है. मावे के फूल को पूरी दुनिया में पीला सोना के नाम से जाना जाता है. इन लोगों को इसके संग्रहण करने के बाद जो राशि मिलती है उससे उनका घर चलता है.

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First published: April 22, 2020, 3:49 PM IST




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