किसानों के साथ नेशनल क्राइम
वादा करके के बाद केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से चावल लेने से मना किया. फिर एथेनॉल प्लांट लगाने की भी अनुमति अब तक नहीं दी गई है और अब खाद को लेकर राज्य से साथ भेदभाव. प्रदेश के किसानों के साथ केंद्र सरकार नेशनल क्राइम कर रही है, केंद्र सरकार का किसानों के प्रति रवैया क्रूरतम हो चुका है.
छत्तीसगढ़ के सभी सांसदों को लिखा पत्र
खाद की कमी को लेकर राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के सभी सांसदों को पत्र लिखकर केंद्र से आग्रह करने को कहा गया है. कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने बताया कि मुख्यमंत्री के द्वारा अतिरिक्त खाद की मांग को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है. डेढ़ लाख डीएपी और डेढ़ लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त यूरिया की मांग की है. वहीं यह भी बताया कि सांसदों को लिखे पत्र का अब तक कोई जवाब नहीं आया है.
छत्तीसगढ़ से सौतेला व्यवहार क्यों
कृषि मंत्री ने आंकड़े शेयर करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश को 70 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश को 63-64% यूरिया सप्लाई की जा चुकी है. फिर छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? क्या कांग्रेस की सरकार है इसलिए. एमपी में 90 फीसदी डीएपी की आपूर्ति की जा चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ में नहीं. क्योंकि वहां बीजेपी की सरकार है और यहां कांग्रेस की. केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के साथ दोहरा रवैया अपना रही है.
बीजेपी का जवाब
कांग्रेस के सवालों का जवाब देते हुए बीजेपी किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि राज्य सरकार अपनी नाकामियां छुपाने के लिए बार-बार केंद्र पर ठीकरा फोड़ती है. क्या राज्य की कांग्रेस सरकार केंद्र के बूते सत्तासीन हुई थी. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि केंद्र मदद करेगा तो ही हम राज्य चला पाएंगे. अगर कांग्रेस सरकार राज्य चला नहीं पा रही है, तो सत्ता छोड़ दे. अपनी नाकामियां छुपाने के लिए इस तरह से बार-बार केंद्र को निशाना न बनाए. केंद्र और राज्य के बीच संघीय व्यवस्था है. केंद्र राज्यों की आवश्यकता के अनुसार खाद सप्लाई करता है. राज्य सरकार के अपने सिस्टम और नीतियों में कमियों की वजह से आज प्रदेश का किसान परेशान है. राज्य सरकार किसानों से किया एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है.
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