दिव्यांशु गनात्रा: भारत के पहले नेत्रहीन पैराग्लाइडर जो मुस्कान लिए बना रहे हैं कीर्तिमान – Divyanshu ganatra first indian visually impaired solo paraglider

किशोरावस्था में हमारे सपने बहुते बड़े और मजबूत होते हैं. पूरी दुनिया एक खेल का मैदान लगती है और हर दिन कुछ नया करने का दिल करता है. दिव्यांशु गनात्रा भी एक ऐसे ही निडर युवक थे, जिनके बड़े-बड़े सपने थे और दिल में उन सपनों को पूरा करने का जज्बा.

दिव्यांशु बचपन से ही एडवेंचर के शौकीन थे और पहाड़ों पर चढ़ने और साइकिलिंग के जरिये दुनिया जीतने का सपना देखते थे. लेकिन जीवन में हमेशा वैसा नहीं होता है जैसा आप चाहते हैं. एक दिन दिव्यांशु जब सुबह उठे तो उनकी आंखों को रोशनी गायब थी. महज 19 साल की उम्र में ग्लौकोमा ने उनकी देखने की शक्ति छीन ली.

इतनी कम उम्र में आंखों की रोशनी खो देना एक बड़ी चुनौती होती है. आपके सपने जो कभी मजबूत हुआ करते थे, वो टूटने से लगते हैं और दुनिया ने आपसे जो उम्मीदें लगायी होती हैं, वो कम हो जाती हैं. ऐसी अनहोनी मजबूत से मजबूत इंसान को भी टूटने पर मजबूर कर देती है. लेकिन दिव्यांशु ने अपनी आंखों की रोशनी गंवाने के बाद भी सपने देखना बंद नहीं किया और वो हर चीज करने की ठान ली जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान आती थी.

दिव्यांशु आज 42 साल के हैं. उन्होंने अपना करियर आईटी प्रोफेशनल के रूप में शुरू किया. 6 साल बाद साइकोलॉजी में चले गए और फिर न्यूरोसाइंस में आ गए. आज वह एक सामाजिक उद्यमी और विकलांगता अधिकार समर्थक के रूप में जाने जाते हैं. साथ ही वे दो कंपनियों के संस्थापक भी हैं. इनमें से एक कंपनी है- एडवेंचर बियॉन्ड बैरियर्स फाउंडेशन (ABBF). ये कंपनी विकलांग लोगों के साथ-साथ सामान्य लोगों के लिए भी एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए काम करती है. हाल ही में संपन्न मुंबई मैराथन 2020 के आयोजकों में से एक ABBF भी थी.

दिव्यांशु की उपलब्धियां सिर्फ उद्यमी गतिविधियों तक सीमित नहीं है. वह हमेशा से साहसी और उत्साही रहे हैं और अपनी आंखों की रोशनी गंवाने के बाद भी एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति उनका जुनून बरकरार रहा है. 2014 में दिव्यांशु गनात्रा भारत के पहले नेत्रहीन सोलो पैराग्लाइडर बन गए. अपनी इस उपलब्धि से उत्साहित होकर ही उन्होंने ABBF की स्थापना की थी.

दो साल बाद वह साइकिल पर मनाली से खरदुंग ला तक की यात्रा करने वाले पहले नेत्रहीन शख्स बने. सितंबर 2018 में उन्होंने दो और दृष्टिहीन लोगों के साथ माउंट किलिमंजारो पर फतह हासिल की जो कि खड़ी चोटी वाला दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर है. उनका दृढ़ विश्वास है कि स्पोर्ट्स में वह ताकत है, जो विकलांगों (PwD) और बाकी लोगों के बीच की खाई को पाट सकती है.

उनकी अविश्वसनीय कहानी और रोमांच के लिए जुनून हमें सीख देते हैं की जीवन की चुनौतियों का सामना कैसे मुस्कुराते हुए करना चाहिए. कोलगेट इंडिया और इंडिया टुडे ग्रुप दिव्यांशु गनात्रा के जज्बे और साहस को सलाम करते हैं.

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