नक्सलियों का गढ़ खत्म करने बस्तर में पुलिस चला रही लोन वर्राटू अभियान, स्थानीय बोली में घर वापसी की अपील | bastar – News in Hindi

नक्सलियों का गढ़ खत्म करने बस्तर में पुलिस चला रही लोन वर्राटू अभियान, स्थानीय बोली में घर वापसी की अपील

बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज.

Naxal Issue: मालूम हो कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के 28 जिलों में से 14 जिले नक्सल (Naxali) के आतंक से प्रभावित हैं. इसमें से 8 तो ऐसे जिले हैं जहां नक्सली अपनी सरकार चला रहे हैं.

रायपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) से नक्सलियों के गढ़ को खत्म करने के लिए पुलिस फोर्स कई तरह के अभियान चला रही है. चाहे वो नक्सलियों (Naxali) की मोस्ट वांटेड लिस्ट हो या फिर लोन वर्राटू अभियान हो. नक्सलियों के खिलाफ इस तरह के अभियान बस्तर पुलिस चला रही है. मालूम हो कि प्रदेश के 28 जिलों में से 14 जिले नक्सल के आतंक से प्रभावित हैं. इसमें से 8 तो ऐसे जिले हैं जहां नक्सली अपनी सरकार चला रहे हैं. इस नासूर को खत्म करने और नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए पुलिस फोर्स लगातार अभियान चला रही है, लेकिन पुलिस-नक्सली मुठभेड़ (Police-Naxal Encounter) में इन इलाकों में रहने वाले आम लोग भी मारे जा रहे हैं.

इस वजह से पुलिस इन इलाकों में नक्सलियों का पांव उखाड़ने के लिए अभियानों का सहारा ले रही हैं. बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज. पी बताते हैं कि उनके फोर्स द्वारा खूंखार 35 मोस्ट वांटेड खूंखार नक्सलियों की लिस्ट हो या फिर दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू नाम का अभियान चलाना हो, सभी पर मुस्तैदी से काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि लोन वर्राटू का स्थानीय भाषा में मतलब होता है, अपने घर वापसी. इस अभियान को लेकर पुलिस गांवों में नक्सलियों के पोस्टर लगा रही हैं और मुख्यधारा में जोड़ने की अपील कर रही है.

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45 से ज्यादा नक्सलियों ने किया सरेंडरआईजी सुंदरराज. पी के मुताबिक इस अभियान के तहत अभी तक 45 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है. बस्तर से नक्सलियों को जड़ से खत्म करने करने के लिए पुलिस ने अपनी कमर कस ली है. इसी का नतीजा है कि पुलिस के सामने नक्सली अपने घुटने टेकने को मजबूर हो रहे हैं. पिछले दो सालों में 770 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया है. साल 2018 में 466 और साल 2019 में 304 नक्सलियों ने सरेंडर किया. वहीं, साल 2020 में अब तक 56 से ज्यादा नक्सली पुलिस के समाने सरेंडर कर चुके हैं. बहरहाल, अब देखना यह होगा कि नक्सलियों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए राज्य सरकार का प्रयास कितना सफल होते है. राज्य सरकार चाह रही है कि नक्सलवाद को जड़ से खत्म कर दिया जाए. अब देखने वाली बात होगी कि प्रदेश से नक्सलियों का खात्म कब तक हो पाता है.




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