- लौटने वालों की संख्या काफी ज्यादा
- सबके क्वारंटीन की व्यवस्था आसान नहीं
केंद्र सरकार के निर्देश के बाद अब बिहार के प्रवासी मजदूर और छात्रों की वापसी की उम्मीद जगी है. इस काम के लिए 19 नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हुई है. सभी नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वे राज्यों में फंसे हुए लोगों की सूची तैयार करें और उनकी वापसी के लिए रास्ता निकालें. लेकिन क्या देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे मजदूरों को वापस लाना बिहार सरकार के लिए आसान होगा?
क्या है चुनौती?
29 अप्रैल तक अन्य राज्यों में फंसे 27 लाख 28 हजार मजदूरों के कॉल बिहार हेल्पलाइन नंबर पर आ चुके हैं. इन सभी ने बिहार सरकार से उन्हें बाहर निकालने की मांग की है.
बिहार सरकार ने कॉल करने वाले सभी लोगों का आधार नंबर मिलाकर उनके अकाउंट में फौरी राहत के लिए 1000 रुपये भेजे हैं. अब तक 17 लाख कॉलर्स के अकाउंट में पैसे चले गए हैं.
बिहार सरकार का मानना है कि तीन मई के बाद अगर लॉकडाउन में ढील दी जाती है और बस-ट्रेन सेवा शुरू होती है तो बिहार वापस लौटने वालों की संख्या 32 लाख से भी ज्यादा हो सकती है. इसमें छात्र और अन्य फंसे हुए लोग नहीं हैं. 32 लाख छोड़ दीजिए अगर 16 लाख लोग भी बिहार पहुंच गए तो इन लोगों को 15 दिनों तक क्वांरटीन में रखना बिहार सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
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बिहार के पास संसाधन नहीं
बुधवार को उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने साफ कहा था कि कि सरकार के पास इतना संसाधन नहीं है कि वह देश के विभिन्न राज्यों में बस भेजकर प्रवासी मजदूरों और छात्रों को वापस बुला सके. सुशील मोदी ने कहा कि सरकार ने रेल चलाने की तो इजाजत नहीं दी है, ऐसे में सभी को बसों से ही वापस आना होगा. हमारे पास कहां इतनी बसें हैं, क्योंकि विभिन्न राज्यों से लोगों को वापस आना है.
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नीतीश सरकार पर विपक्ष हमलावर
मजदूरों और छात्रों की प्रदेश वापसी के लिए विपक्ष नीतीश कुमार सरकार पर लगातार हमलावर है. राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव कई बार आरोप लगा चुके हैं कि बिहारियों को वापस राज्य लाने के लिए मंशा नीतीश कुमार सरकार की नहीं है. नीतीश कुमार सरकार पर विपक्ष का भारी दबाव था. केंद्र से ढील मिलने के बाद बिहार सरकार ने मजदूरों को वापस लाने का फैसला किया है.
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बिहार में 4 नए संक्रमण के केस सामने आने के बाद संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 407 हो गई है. लॉकडाउन के बावजूद संक्रमण बढ़ रहा है. इससे पहले जब गृह मंत्रालय ने लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों में फंसे हुए मजदूरों-छात्रों के लिए नई गाइडलाइन जारी की तब नीतीश कुमार ने केंद्र के फैसले का स्वागत किया था. नई गाइडलाइन के तहत फंसे हुए लोग अपने घर जा सकेंगे.

