नेपाल में राजशाही पर आर-पार, दुनिया के इकलौते ‘हिंदू राष्ट्र’ का फिर होने जा रहा उदय? चीन का क्या है रोल

Nepal Monarchy Restoration Movement Latest News: नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग तेज हो गई है. वहां पर जो आंदोलन शुरू हुआ है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि हिंदू राष्ट्र बनने के बाद ही ये शांत हो पाएगा. 28 मार्च से ही शहर शहर प्रदर्शन जारी है.. हिंदू राष्ट्र के नाम पर जो चिंगारी भड़की है, वो कभी भी ज्वालामुखी बनकर फूट सकती है. सवाल उठ रहा है कि नेपाल के इस हाल के पीछे चीन का क्या रोल है. 

क्या नेपाल में होने वाला है तख्तापलट?

हिंदू राष्ट्र  की मांग के लिए नेपाल के हिंदुओं ने मानो ऐलान ए जंग कर दिया है. नेपाल के भ्रष्टतंत्र के खिलाफ आम आदमी का गुस्सा ऐसा भड़का है कि नेपाल का तख्त हिल गया है. भीड़ में ऐसा आक्रोश है कि इस बार मानो तख्तापलट तय है. लगातार तीन दिन से विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आ रही हैं. राजशाही की मांग को लेकर जली ये ज्वाला शांत नहीं होती दिख रही है.

काठमांडू में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो चला है. राजशाही समर्थकों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़प के दौरान 2 लोगों की मौत भी हो गई थी. जिसके बाद काठमांडू के कई इलाकों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा. प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए सेना को भी मोर्चा संभालना पड़ा. लेकिन नेपाल में हिसा की आग भड़काई किसने. क्या इसके लिए पूर्व राजा ज्ञानेंद्र जिम्मेदार हैं या फिर ओली सरकार. ये बड़ा सवाल है. हालांकि सबसे ज्यादा सवाल ओली सरकार पर उठ रहे हैं.

पूर्व राजा पर हिंसा भड़कने का आरोप

आरोप है कि हिंदू राष्ट्र और राजशाही की डिमांड से ओली डर गए हैं. इसीलिए ओली सरकार ने राजशाही और हिंदू राष्ट्र को लेकर चल रहे आंदोलन को भड़काया.. ताकि हिंसा का नाम देकर पूरे आंदोलन को कुचला जा सके. तभी तो ओली सरकार पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को लेकर एक्शन मोड में है. पहले पूर्व राजा पर हिंसा भड़काने का आरोप लगा कर नजरबंद किया गया. फिर उनका पासपोर्ट जब्त किया गया. हिंसा में हुए नुकसान के भरपाई के लिए जुर्माना भी लगाया गया. अब पूर्व राजा ज्ञानेंद्र पर गिरफ्तारी की तलवार भी लटक रही है. 

दरअसल नेपाल में पिछले कुछ समय से राजशाही को वापस लाने की मांग बढ़ी है. नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह भी इसमें काफी एक्टिव नजर आए हैं. नेपाल के लोग देश में ‘राजा लाओ, देश बचाओ’ को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. फरवरी 2025 में लोकतंत्र दिवस के बाद से ही नेपाल में राजशाही समर्थक एक्टिव हो गए थे.  राजशाही की वापसी की मांग तेज क्यों है. इसके पीछे भी बड़ी वजह है.

नेपाल में चीन के दखल से लोग नाराज

असल में नेपाल 2008 तक एक हिंदू राष्ट्र था. लेकिन जब वहां पर राजतंत्र खत्म करके लोकतांत्रिक सरकार स्थापित हुई तो उसने नेपाल को हिंदू राष्ट्र से सेक्युलर कंट्री घोषित कर दिया. उसके बाद से अब तक नेपाल में 13 प्रधानमंत्री बदल चुके हैं. तब से अब तक देश में बेरोजगारी बढ़ी है और मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. यही वजह है कि अब जनता फिर से राजा को तख्त ओ ताज देना चाहती है. 

राजशाही की वापसी की वजह नेपाल में चीन का दखल भी है. माना जाता है कि राजशाही को खत्म करने के पीछे चीन का बड़ा हाथ था. चीन राजशाही की वापसी रोकने के लिए दोनों मुख्य कम्यूनिस्ट पार्टियों को एकजुट करने की कोशिश में है. इसके अलावा चीन ने नेपाल में मैंडरीन भाषा को बढ़ावा देने के लिए 9000 टीचर भी भेजे हैं. 

दोबारा हिंदू राष्ट्र बनेगा नेपाल!

लेकिन चीन और नेपाल की कम्यूनिस्ट पार्टियों की साजिश जनता समझ गई है. यही वजह है कि एक बार फिर नेपाल में राजशाही की वापसी के लिए लड़ाई शुरू हो गई है. इस आंदेलन को देखकर ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि नेपाल जल्द ही एक बार फिर हिंदू राष्ट्र घोषित हो जाएगा.

ब्यूरो रिपोर्ट जी मीडिया


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