मदद की जिद्द, जब गुल्लक लेकर मुंगेली कलेक्टर के पास पहुंची एक 9 साल की बच्ची…., 9 year baby girl of mungeli set an example by givinh all money in her piggy bank in cm relief fund | mungeli – News in Hindi

मुंगेली. पूरा देश इस वक्त कोरोना महामारी (COVID-19) से जूझ रहा है. संकट की इस घड़ी में लोग एक दूसरे की मदद करने की पूरी कोशिश भी कर रहे हैं. ऐसे हालातों में अब लोगों की मदद करने बच्चे भी आगे आ रहे हैं. मुंगेली (Mungeli) नगर के विनोबा भावे वार्ड की एक 9 साल की बच्ची अन्वेषा ने सहयोग की ऐसी मिसाल पेश की जो सभी के लिए प्रेरक है. पूरा देश इस समय वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से जंग लड़ रहा है. इस दौरान कई उद्योगपति, राजनेता, सामाजिक संगठन के लोग मदद के लिए आगे आये हैं.

लेकिन मुंगेली की 9 साल की बच्ची अन्वेषा देवांगन ने पिछले 2-3 सालों से गुल्लक में जोड़ कर रखे रकम को कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा करा दिया. अन्वेषा देवांगन एक दो दिन से घर में जिद कर रही थी कि उसे भी देश की मदद करनी है. वो अपने गुल्लक में जोड़े धन राशि को मदद के लिए देगी. इसके लिए परिजनों ने वार्ड के पार्षद श्रीनिवास सिंह से संपर्क किया. फिर बुधवार को अन्वेषा देवांगन कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची और कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे को अपना गुल्लक सौंपा. कलेक्टर ने जब गुल्लक में से पैसे गिनवाए तो 3 हजार एक रुपए की राशि निकली जिसे मुख्यमंत्री सहायता कोष में जमा कराया गया.

साइकिल के लिए जोड़े थे अन्वेषा ने पैसे

अन्वेषा देवांगन कक्षा 5वीं की छात्रा है. अन्वेषा के पिता राजेश देवांगन एक छोटा सा किराना दुकान चलाते हैं जिससे परिवार का गुजर होता है. वहीं बच्ची अपने लिए साइकिल लेने पैसे जोड़ रही थी. लेकिन लगातार न्यूज चैनल और अखबार में लोगों को कोरोना पीड़ितों की मदद करते देख उसके मन में भी मदद करने का भाव आया. जब उसने अपना गुल्लक कलेक्टर को सौंपा तो उसे बड़ी खुशी हुई. उसे अहसास हुआ कि देश के लिए उसने कुछ किया है.

कलेक्टर ने बच्ची को दिया प्रमाण पत्र

साइकिल लेने जोड़े गुल्लक की राशि कोरोना पीड़ितों को सौंपने वाले बच्ची के प्रति कलेक्टर ने आभार जताते हुए प्रमाण पत्र भी सौपा. कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने न्यूज़ 18 को बताया कि बच्ची का यह सहयोग बहुत ही सराहनीय है. कौन कितनी बड़ी राशि का सहयोग कर रहा वो महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि ये ज्यादा महत्व रखता है कि किस भावना से सहयोग किया जा रहा है. अन्वेषा ने जिस तरह की मदद की उसके लिए बच्ची और उनके परिजनों के आभारी हैं.




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