- भारत ने औसतन हर दिन अधिक नए केसों को जोड़ा
- लॉकडाउन 4.0 में हर दिन 6,700 से अधिक नए केस
- लॉकडाउन 4.0 में कोरोना मृत्यु दर भी आई है नीचे
जैसे कि भारत ने 1 जून से खुद को ‘अनलॉक’ करना शुरू किया है, ज्यादातर लोगों के दिमाग में यह सवाल है कि लॉकडाउन के चार चरणों ने क्या हासिल किया? कुल मिलाकर कहा जाए तो लॉकडाउन ने Covid-19 संक्रमण के प्रसार पर ब्रेक नहीं लगाया लेकिन भारत ने कुछ संकेतकों पर अच्छा प्रदर्शन किया.
प्रत्येक लॉकडाउन अवधि के दौरान, भारत ने औसतन हर दिन अधिक नए केसों को जोड़ा. सबसे हालिया लॉकडाउन 4.0 में, भारत ने हर दिन 6,700 से अधिक नए केस जोड़े. सिर्फ ब्राजील और अमेरिका ने ही इस अवधि में भारत से अधिक केस जोड़े.

हालांकि, अच्छी खबर यह है कि लॉकडाउन 4.0 में सक्रिय केसों की संख्या में धीमी गति से बढ़ोतरी हुई. इस अवधि में सक्रिय केसों के दोगुना होने की दर 24 दिनों तक बढ़ गई. ये दो बातों को दिखाता है- नए केसों की खोज की रफ्तार को धीमा करना और रिकवरी का बढ़ना. हालांकि लॉकडाउन अवधियों में मौतों का दैनिक आंकड़ा लगातार बढ़ा लेकिन मृत्यु दर में कमी आई और लॉकडाउन 4.0 में केस मृत्यु दर भी नीचे आई.

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लॉकडाउन 4.0 आने तक, भारत हर दिन एक लाख से अधिक टेस्ट कर रहा था. लॉकडाउन 4.0 के अंत तक, भारत ने आखिरकार हर दस लाख लोगों पर किए गए टेस्ट के मामले में बांग्लादेश और पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया, लेकिन वैश्विक स्तर पर अभी भी टेस्टिंग को लेकर देशों के निचले वाले आधे हिस्से में भारत बना हुआ है.

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आखिर में अहम सवाल, क्या लॉकडाउन ने सरकार को स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए वक्त दिया? इस सवाल का जवाब देना मुश्किल है, क्योंकि अस्पताल बेड्स, आइसोलेशन बेड्स या वेंटिलेटर्स की मौजूदा उपलब्धता जानने का कोई अपडेटेड सोर्स नहीं है.

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सरकार का कहना है कि सिर्फ 5 प्रतिशत मरीजों को ही गहन देखभाल की आवश्यकता है. लेकिन मुंबई पहले से ही यह रिपोर्ट कर रही है कि इसकी इंटेसिव केयर यूनिट्स (ICUs) भरी हुई है. क्या देश को अनलॉक करने पर देहात और कम विकसित जिले केसों की संख्या से निपटने के लिए तैयार हैं? ये यक्ष प्रश्न बना रहेगा और दुर्भाग्य से इसका जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है.