- तीन जुलाई को 10 ट्रेड यूनियन करेंगी देशव्यापी प्रदर्शन
- श्रम नीतियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर करेंगी यूनियन
भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस और भारतीय व्यापार संघ सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने तीन जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. सभी ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया है. इस मुद्दे पर अपना रोष प्रकट करने के लिए ही ट्रेड यूनियनों पूरे देश में 3 जुलाई को विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है.
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि हम तीन जुलाई 2020 को राष्ट्रव्यापी विरोध के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी संबद्ध संगठनों से मजदूर वर्ग और ट्रेड यूनियनों का आह्वान करते हैं.
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ये 10 ट्रेड यूनियन इस विरोध प्रदर्शन में होंगी शामिल
तीन जुलाई को होने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, सेल्फ-एम्प्लॉइड वुमेंस एसोसिएशन, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस शामिल होंगे.
सीटू ने की अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन से शिकायत
यहां ये भी बता दें कि इससे पहले भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन यानी CITU ने यूपी, एमपी और गुजरात सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए बदलाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन से इस मामले में बीच-बचाव करने की मांग की थी. जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने इस बदलाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी.
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अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर ने पीएम मोदी को इस संबंध में एक खत भी लिखा था. उसमें उन्होंने पीएम मोदी से अपील की थी कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार श्रम कानून की सुरक्षा सुनिश्चित करें और महानिदेशक गाय राइडर श्रम कानून द्वारा निर्धारित मानकों का पालन करें.
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