बिलासपुर. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बिलासपुर (Bilaspur) जिले से बड़ी खबर है. यहां मरवाही वन परीक्षेत्र के बेलझिरिया गांव में 40 हाथियों का दल पहुंच गया है. हाथियों ने फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचाया है. इनके आने से गांववालों में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग हाथियों की निगरानी कर रहा है. ग्रामीण शोर-शराबा कर हाथियों को भगाने में जुटे हैं. हाथियों का दल हफ्ते में दूसरी बार यहां पहुंचा है.
छत्तीसगढ़ में हाथियों का जबरदस्त आतंक है. यहां के कई जिलों में हाथी जबरदस्त उत्पात मचाकर लोगों की जान तक ले लेते हैं. राज्य में पिछले तीन वर्षों में हाथियों के हमले में 204 लोगों की मौत हुई है. इस दौरान 45 हाथियों ने भी दम तोड़ा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2018, 2019 और 2020 में हाथियों के हमलों में 204 लोगों की मौत हुई है. यही नहीं, इस दौरान 97 लोग घायल हुए हैं. इस अवधि के दौरान हाथियों से फसलों को नुकसान पहुंचने के 66,582 मामले, घरों को नुकसान पहुंचने के 5047 मामले और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचने के 3151 मामले दर्ज किए गए हैं. इस वजह से इन तीन वर्षों में सरकार द्वारा लोगों को 57,81,63,655 रुपये का मुआवजा दिया गया है.
इन जगहों पर दिखता है हाथियों का आतंक
छत्तीसगढ़ के उत्तर क्षेत्र के सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर, रायगढ़ और कोरबा जिलों में इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष में ज्यादातर लोगों की जान गई है. छत्तीसगढ़ के वन मंत्री के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों के दौरान राज्य में 45 हाथियों की मृत्यु की जानकारी मिली है. इनमें से वर्ष 2018 में 16 हाथियों की, वर्ष 2019 में 11 हाथियों की और वर्ष 2020 में 18 हाथियों की मृत्यु हुई है.
सरकार ने उठाया ये कदम
राज्य सरकार की ओर से हाथियों के हमले रोकने के लिए कोरबा में लेमरू एलीफेंट रिजर्व बनाने का ऐलान किया गया है. 450 वर्ग किलोमीटर घने जंगलों वाले लेमरू वन परिक्षेत्र में एलिफेंट रिजर्व बनेगा. इस बाबत सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि हाथियों की आवाजाही से कई बार जान-माल की हानि होती है. इसकी एक बड़ी वजह है, हाथियों को उनकी पसंदीदा जगह पर रहने की सुविधा नहीं मिल पाना भी है.
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