5 लाख की इनामी नक्सली बहन ने सरेंडर कर भाई से कहा- राखी पर करूंगी इंतजार, लौट आओ! | bastar – News in Hindi

5 लाख की इनामी नक्सली बहन ने सरेंडर कर भाई से कहा- राखी पर करूंगी इंतजार, लौट आओ!

सरेंडर करने वाली नक्सली दशमी ने भाई से सरेंडर करने की अपील की है. 

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जगदलपुर (Jagdalpur) में पुलिस के सामने महिला नक्सली (Naxali) दशमी ने किया सरेंडर. पांचवीं कक्षा तक पढ़ी दशमी 11 साल की उम्र में नक्सली संगठन में शामिल हुई थी. नक्सलियों के लिए लिखती थी गाने.

जगदलपुर. ”भैया में अपील करती हूं कि नक्सल संगठन की खतरनाक राह छोड़कर अब घर आ जाओ, मैंने जाने-अनजाने में जो राह बचपन में पकड़ ली थी, अब उनसे किनारा कर लिया है. मैं चाहती हूं कि इतने साल तक मेरे भाई की कलाई जो राखी के बिना सूनी थी, इस साल उस पर राखी (Raksha Bandhan 2020) बांध सकूं. इसलिेए तुम भी घर लौट आओ…” पढ़ने में ये बातें आपको फिल्मी लग रही होंगी, लेकिन यह सच है. जी हां, जगदलपुर में बीते दिनों पकड़ी गई 5 लाख रुपए की इनामी नक्सली (Naxali) दशमी ने अपने भाई से यह अपील की है. दशमी का भाई लक्ष्मण नक्सली संगठन में काम करता है.

11 साल की उम्र में चुनी गलत राह
जगदलपुर के पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में आईजी बस्त रेंज जीपी सुंदरराज और अन्य अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के बाद दशमी ने नक्सली संगठन और उसकी गतिविधियों के बारे में बात की. दशमी ने बताया कि देवा नामक नक्सली के कहने पर वह 11 साल की उम्र में संगठन में शामिल हुई थी. माओवादियों चेतना नाट्य मंडली में रहकर वह नाच-गाकर नक्सलियों का मनोरंजन करती थी. 10-12 साल तक काम करने के बाद अब उसे लगा कि इस राह पर चलते हुए हमेशा मौत उसका पीछा करती है. इसलिए दशमी ने सरेंडर करने का फैसला किया.

नक्सलियों के लिए लिखती थी गानेदशमी ने न्यूज 18 के साथ बातचीत में कहा कि वह पांचवीं कक्षा तक पढ़ी है. चेतना नाट्य मंडली में रहते हुए उसने नक्सलियों के लिए गाने भी लिखे. दशमी ने बताया कि उसने संगठन में रहने के दौरान करीब 35 गीत लिखे. वह खुद भी गाती थी, उसके साथी भी इसमें शरीक होते थे. सरेंडर करने के बाद क्या करेगी के सवाल पर दशमी ने कहा कि अब वह गांव में रहकर माओवादियों के खिलाफ गीत लिखेगी. गांव वालों को बताएगी कि माओवादी किस तरह अपने स्वार्थ के लिए ग्रामीण लोगों से बहला-फुसलाकर काम कराते हैं.

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भाई से कभी-कभार मिल पाती थी
न्यूज 18 के साथ बातचीत के दौरान दशमी ने अपने नक्सली भाई लक्ष्मण के बारे में भी बताया. उसने कहा कि संगठन में रहने के दौरान वह कभी-कभार ही भाई से मिल पाती थी. दोनों का कार्यक्षेत्र अलग था, इसलिए मुलाकात नहीं हो पाती थी. लक्ष्मण अभी नक्सल कमांडर है. दशमी ने कहा कि सरेंडर करते समय जब उसने बाहरी दुनिया देखी, तब उसे लगा कि जंगल में उसका जीवन कितना तकलीफ भरा था. दशमी ने कहा कि हर वक्त पुलिस मुठभेड़ और मौत का डर लगा रहता है. आजकल चारों तरफ कोरोना वायरस के संक्रमण का डर भी फैला हुआ है. दशमी ने बताया कि नक्सल संगठनों में काम करने वाले भी इस महामारी से डरे हुए हैं.

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दशमी को उम्मीद- लौट आएगा भाई
पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद दशमी को अब भाई की चिंता रही है. दशमी को लगता है कि किसी दिन पुलिस मुठभेड़ में उसका भाई मारा न जाए, इसलिए उसने भाई से भी लौट आने की अपील की है. दशमी ने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है, उसे इस साल राखी का इंतजार है. क्योंकि दशमी को उम्मीद है कि उसका भाई भी सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट आएगा और वह अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकेगी.




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