छतरपुर, मध्य प्रदेश: चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर पद्म विभूषण जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने हाल ही में दिए गए अपने एक बयान पर सफाई दी है, जिसमें उन्होंने प्रेमानंद जी के संस्कृत ज्ञान पर कथित तौर पर टिप्पणी की थी। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चल रही बहस के बाद, रामभद्राचार्य जी ने एक नया बयान जारी कर मामले को शांत करने की कोशिश की है।
जगतगुरु रामभद्राचार्य जी ने कहा कि उन्होंने प्रेमानंद जी के खिलाफ कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट किया, “प्रेमानंद जी मेरे पुत्र जैसे हैं। आचार्य होने के नाते मैं सबसे कहता हूँ कि संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए। सामान्य लोग चोला पहनकर वक्तव्य दे रहे हैं, जिन्हें एक अक्षर आता-जाता नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि उनके लिए सभी संत स्नेह-भाजन हैं और वह चमत्कार को नमस्कार नहीं करते, यह सच है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके खिलाफ गलत तरीके से भ्रम फैलाया जा रहा है कि उन्होंने प्रेमानंद जी या किसी अन्य संत के प्रति कोई प्रतिकूल टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, “जब भी प्रेमानंद जी मुझसे मिलने आएंगे, मैं उन्हें आशीर्वाद दूंगा और अपने हृदय से लगाऊंगा। मैं उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए भगवान राम से कामना करता हूँ।” यह बयान पिछले दिनों हुई टिप्पणी के बाद उनके और प्रेमानंद जी के समर्थकों के बीच उपजे विवाद को खत्म करने की एक कोशिश है।