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शहबाज को हिंदुत्व से डर क्यों लगता है? पाक पीएम ने रची साजिश, क्या है मंशा?

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शहबाज को हिंदुत्व से डर क्यों लगता है? पाक पीएम ने रची साजिश, क्या है मंशा?

DNA Analysis: योगी आदित्यनाथ को जिस हिंदुत्व का पोस्टर बॉय कहा जाता है. उसी हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रची और इस साजिश को अंजाम देने के लिए मंच चुना संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र महासभा जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में किस तरह पाकिस्तान के पीएम ने हिंदुत्व को लेकर झूठा एजेंडा फैलाया सबसे पहले आपको ये पढ़ना चाहिए.

शहबाज शरीफ हिंदुत्व ठीक से बोल तक नहीं पा रहे हैं वो दुनिया के सबसे प्राचीन और विविधता से भरे धर्म और देश यानी भारत को कट्टरपंथ से जोड़ रहे हैं. आज हम हिंदुत्व के खिलाफ शहबाज और पाकिस्तान की इसी साजिश को डीकोड करने जा रहे हैं. हमारे इस विश्लेषण को समझने के लिए आपको भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे बड़े फर्क को बेहद गौर से समझना चाहिए. 

1947 में स्वतंत्रता के बाद जब वर्ष 1951 में पहली जनगणना की गई थी. तब भारत की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 9.8 प्रतिशत थी. दूसरी तरफ पाकिस्तान की बात करें वर्ष 1951 की जनगणना में आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी सिर्फ 1.6 प्रतिशत थी. भारत की  पिछली जनगणना यानी वर्ष 2011 में  आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत पहुंच गई थी और आज के अनुमान के मुताबिक ये आंकड़ा तकरीबन 20 प्रतिशत माना जाता है. जबकि पाकिस्तान की वर्ष 2017 की जनगणना में आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी सिर्फ 1.7 प्रतिशत पाई गई थी. 

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ये आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि हिंदू बहुल भारत में मुस्लिमों की आबादी बढ़ी उन्हें आगे बढ़ने के मौके मिले लेकिन मुस्लिम बहुल पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी नाम बराबर ही बढ़ी. यहां सवाल धर्म का नहीं बल्कि पाकिस्तान के उस सिस्टम और समाज का है जिसने हिंदुओं को मौके देना तो दूर उनसे सम्मान के साथ जीने की आजादी भी छीन ली है. ये हम नहीं कह रहे ये कटु सत्य अमेरिकी विदेश विभाग की उस रिपोर्ट में बताया गया था. जो पाकिस्तान के हिंदुओं पर तैयार की गई थी. आपको भी इस रिपोर्ट के अहम हिस्से बेहद गौर से देखने चाहिए. 

अमेरिकी विदेश विभाग की इस रिपोर्ट में साफ साफ कहा गया था कि पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ संगठित अपराध होते हैं. खासकर पाकिस्तान के सिंध प्रांत में धर्म के आधार पर चिन्हित करके हिंदुओं की हत्याएं की गई हैं. 13 साल तक की हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराकर मुस्लिमों से उनकी शादी कराई जाती है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंदुओँ को बंधुआ मजदूरों की तरह रखा जाता है. इस रिपोर्ट में यहां तक कहा गया था कि कोविड के दौरान हिंदुओं को वो राहत सामग्री भी नहीं दी गई थी जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से पाकिस्तान को मिली थी. 

अगर संयुक्त राष्ट्र के मंच पर बोलने से पहले शहबाज के सलाहकारों ने उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग की इस रिपोर्ट के बारे में बताया होता तो शायद वो हकलाते हुए हिंदुत्व को बदनाम करने का एजेंडा ना चलाते. पाकिस्तान में हिंदू बेटियों को निशाना बनाया जाता है हिंदू मंदिरों को उन्माद का शिकार बनाया जाता है और तो और पाकिस्तान के स्कूलों की किताबों तक में हिंदुओं के लिए नफऱत भरे अल्फाज ही लिखे जाते हैं. पाकिस्तान में किस तरह छोटे छोटे बच्चों के अंदर हिंदुओं के खिलाफ नफरत का जहर भरा जाता है. ये समझने के लिए आपको अमेरिकी संस्था  Commission on International Religious Freedom की रिपोर्ट को ध्यान से देखना और समझना चाहिए. 

इस संस्था ने पाकिस्तान के स्कूलों में पढ़ाई जा रही किताबों का अध्ययन किया था पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरकारी सिलेबस में 8वीं कक्षा की किताबों में लिखा गया है. हिंदू धर्म में अद्वैतवाद की कमी है और आध्यात्मिक तौर पर हिंदू धर्म कमजोर है. इसी तरह छठी कक्षा की एक किताब में लिखा गया है. हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें और मूर्तियां तर्क विहीन हैं 10वीं की किताब में पाकिस्तान की आजादी को लेकर लिखा गया है कि ब्रिटिश राज में हिंदुओं ने मुसलमानों पर जुल्म ढाए थे. जिसकी वजह से बंटवारा किया गया था. 

पीढ़ी दर पीढ़ी पाकिस्तानी समाज में हिंदुओं के खिलाफ यही नफरत की घुट्टी पिलाई गई है. जिसकी वजह से पाकिस्तान में हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक माना जाता है. आज के दौर में तो खुद पाकिस्तान की अवाम कबूलने लगी है कि हिंदुओं पर जुल्म होते हैं लेकिन ये पाकिस्तान है जहां सिस्टम और सरकार तालीम और तहजीब से नहीं बल्कि ताकत और तिकड़म से चलते हैं सालों तक पाकिस्तान ने कश्मीर के नाम पर भारत विरोधी माहौल तैयार किया और अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद हिंदुत्व को भारत विरोध का एजेंडा का हथियार बना दिया गया है. इसी वजह से शहबाज और मुनीर लगातार हिंदुत्व पर ही  बयान दे रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद यानी 15 मई को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति में शहबाज शरीफ ने कहा था भारत का हिंदुत्व दुनिया के लिए खतरा है फिर 10 जुलाई को कोर कमांडरों की मीटिंग में आसिम मुनीर ने कहा था. भारत के विस्तारवादी इरादों का हमें पता चल गया है ये हिंदुत्व पूरी दुनिया के लिए खतरा है और अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज कह रहे हैं हिंदुत्व की विचारधारा खतरनाक है. ये बयान साबित कर देते हैं कि पाकिस्तान की स्टेट पॉलिसी में अब हिंदुत्व और हिंदू को वो धुरी बनाया जाएगा. जिसके जरिए पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा आगे चलेगा शायद शहबाज शरीफ ने कभी हिंदुत्व के मूल को समझा नहीं होगा तो आज हम उन्हें सनातनी परंपरा के एक प्रतीक से अवगत करा देते हैं. ये प्रतीक यजुर्वेद का एक मंत्र है जो शहबाज शरीफ को जरूर पढ़ना चाहिए. 

इसे शांति मंत्र कहते हैं और इसके उच्चारण से सृष्टि के सभी तत्वों जैसे अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियां, वनस्पति, विश्व, देवतागण, और ब्रह्म  में शांति की प्रार्थना की जाती है. अगर पाकिस्तान की सरकार और सिस्टम हिंदुत्व की असल विचारधारा से जुड़े इस मंत्र को समझ जाए तो शायद उनकी आने वाली पीढ़ियां अमन और चैन के साथ जी पाएंगी. 


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