Dna Analysis US Iran tension Silent battle going on between America and Iran know detail

DNA Analysis: एक बयान जारी करके ट्रंप ने कहा है कि अगर मैं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की जगह होता तो मैं रोजाना एक जगह नहीं सोते. हम चाहे तो खामेनेई की लाइव लोकेशन मीडिया के जरिए दुनिया को बता सकते हैं. ये सिर्फ ट्रंप का बयान नहीं बल्कि खामेनेई के लिए सीधी चेतावनी है. इस बयान में ट्रंप ने बिना नाम लिए ये इशारा दिया कि जो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ हुआ था. वैसी कार्रवाई खामेनेई के खिलाफ की जाएगी. 3 जनवरी को अमेरिकी सैन्य दस्तों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस से मादुरो को किडनैप कर लिया था. इस कार्रवाई के बाद खबर आई थी कि मादुरो रोजाना सोने के लिए अलग-अलग लोकेशंस का इस्तेमाल करते थे और अमेरिकी इंटेलिजेंस ने इन लोकेशंस का पता लगाकर मादुरो को अपने जाल में फंसा लिया था. 

खामेनेई को ट्रंप की धमकी

खामेनेई को भी ट्रंप ने यही धमकी दी है कि खुफिया जानकारी के आधार पर जिस तरह मादुरो को उठा लिया गया था, उसी स्तर की खुफिया जानकारी खामेनेई को लेकर भी अमेरिका के पास है. यानी खामेनेई को झुकाने के लिए ट्रंप सीधे उनकी जिंदगी की सुरक्षा को लेकर चेतावनी जारी कर रहे हैं. ट्रंप की ही तरह खामेनेई का खेमा भी इस साइलेंट बैटल को पूरी ताकत के साथ लड़ रहा है. इस साइलेंट संग्राम में खलीफा यानी खामेनेई ने कौनसा दांव चुना है. ये भी आपको ध्यान से देखना और समझना चाहिए.

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ईरान भी पहुंचाएगा अमेरिका को नुकसान!

अमेरिका का साल्ती सैन्य अड्डा जॉर्डन के उत्तर पूर्वी प्रांत जार्का में स्थित है. इस सैन्य अड्डे पर साल के 12 महीनों 4 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं. इस मिलिट्री बेस पर अमेरिकी एयरफोर्स के 48 लड़ाकू विमान, लंबी दूरी के ड्रोन की एक यूनिट और 6 राडार से लैस विमान मौजूद हैं. इसके साथ ही साथ साल्ती में अमेरिका ने अपनी सबसे आधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली थाड को भी तैनात कर रखा है. अगर कुल मिलाकर देखा जाए तो साल्ती एयरबेस पर अमेरिका के 57131 करोड़ रुपए की लागत के उपकरण तैनात हैं. इसका सीधा मतलब है अगर ईरान ने इस सैन्य अड्डे को तबाह किया तो अमेरिका को सामरिक के साथ ही साथ आर्थिक नुकसान भी होगा. यहां नोट करने वाली बात है कि अमेरिका और ईरान में से किसी ने हथियार का इस्तेमाल नहीं किया है लेकिन हथियारों का जिक्र करके दबाव बढ़ाने की कोशिश की है. इस कथित साइलेंट बैटल को आगे बढ़ाया है.

ईरान किस रणनीति पर कर रहा काम?

हिंदी की एक कहावत है, लोहा ही लोहे को काटता है. इस कहावत का अर्थ है कि शत्रु को हराने के लिए उसके जैसी रणनीति का इस्तेमाल करना पड़ता है. इसी विचार पर ईरान आगे बढ़ रहा है. जिस तरह ट्रंप कभी बातचीत का दम भरते हैं और कभी हमला करने की धमकी देते हैं. वैसी ही नीति खलीफा यानी खामेनेई ने भी अपना ली है. अब हम आपके सामने ईरान की इसी नीति को डीकोड करने जा रहे हैं. अब से कुछ ही घंटे ही ईरान के विदेशमंत्री अब्बास अरागची जेनेवा पहुंचे हैं. जेनेवा में अरागची ईरान के उस परमाणु कार्यक्रम पर बात करेंगे जिसपर अमेरिका और इजरायल को ऐतराज है. जेनेवा पहुंचने से पहले अरागची ने ये संकेत दिया था कि अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान परमाणु बम के लिए यूरेनियम के संवर्धन को रोक सकता है. इस बयान से लगा कि शायद ईरान अब ट्रंप के सामने झुकने को तैयार है.

यहां ईरान ने ट्रंप वाला ही दांव चल दिया. बातचीत से पहले यूरेनियम संवर्धन रोकने पर सहमति जताने का संकेत तो दिया लेकिन जब बातचीत की टेबल पर पहुंचे तो अल्फाज बेहद सख्त हो गए. जेनेवा में मीडिया से बातचीत करते हुए खामेनेई के दूत ने ट्रंप को क्या पैगाम दिया है. ये भी आपको गौर से सुनना और समझना चाहिए.

ट्रंप का गाजा पीस बोर्ड मिशन

ईरान के साथ ही साथ इन दिनों ट्रंप का ध्यान एक और मिशन पर भी है. ये मिशन है ट्रंप का वो पीस बोर्ड जो गाजा के लिए बनाया गया है. 19 फरवरी को इस बोर्ड की पहली मीटिंग है और इस मीटिंग में सबसे ज्यादा फजीहत होगी पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की. पाकिस्तानी अवाम की मर्जी के खिलाफ जाकर मुनीर ने पीस बोर्ड का हिस्सा बनने पर रजामंदी जताई थी और अब मीटिंग मे शामिल होकर मुनीर, शहबाज ये बता देंगे कि वो ट्रंप के लिए कथित इस्लामिक ब्रदरहुड को भी दरकिनार करने से परहेज नहीं करेंगे. गाजा पीस बोर्ड के साथ ही साथ एक और खबर की वजह से आज मुनीर का नाम हेडलाइंस में है. आज पाकिस्तान और तालिबान दोनों ने बता दिया कि किसने कौनसा खेमा चुना है.

ईरान-अमेरिका के बीच साइलेंट बैटल

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि 14 फरवरी को मुनीर ने जर्मनी में अमेरिका के इंटेलिजेंस अधिकारियों से मुलाकात की थी और ईरान से टकराव की स्थिति में अमेरिका को पाकिस्तानी समर्थन का आश्वासन दिया था. दूसरी तरफ मुनीर के दुश्मन बन चुके अफगान तालिबान ने ऐलान कर दिया है, अगर अमेरिका ने हमला किया तो तालिबान पूरी ताकत और शिद्दत के साथ ईरान का साथ देगा. अब तक ईरान और अमेरिका के बीच साइलेंट बैटल यानी बिना हथियारों वाला युद्ध चल रहा है लेकिन  जिस वक्त ईरान के ऊपर अमेरिका हमला करेगा उसी वक्त मुनीर के आगे कुआं और पीछे खाई बन जाएगा. मुनीर की वजह से पाकिस्तान-ईरान के दशकों पुराने संबंधों पर चोट लगेगी तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ उसे एक और लड़ाई मोल लेनी पड़ेगी.

मुनीर को अपनी उंगलियों पर नचाने वाले डॉनल्ड ट्रंप, आज अपने ही देश में मजाक का पात्र बन गए. ट्रंप के अस्थिर बयानों और अराजक नीतियों की वजह से आज अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ट्रंप सरकार पर बहुत सख्त टिप्पणी की है. ओबामा ने ट्रंप को जोकर बताया है. एक इंटरव्यू में ओबामा ने कहा है कि ट्रंप सरकार को अगर जोकर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस सरकार में शामिल लोगों के अंदर से शर्म खत्म हो गई है. इन्हें सार्वजनिक जीवन को जीने का सलीका तक नहीं आता. अमेरिका में ऐसे जोकरों वाली सरकार इस देश का दुर्भाग्य है. 




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