मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका के मरीन कमांडो बड़ी संख्या में खाड़ी देशों में पहुंच रहे हैं, जिससे ईरान पर संभावित जमीनी हमले की आशंका जताई जा रही है।ईरानी सूत्रों का दावा है कि संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। चेतावनी दी गई है कि यदि अमेरिका जमीनी सेना भेजता है, तो यूएई में बड़े स्तर पर जवाबी हमले किए जाएंगे।
इस बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसके प्रभावित होने से भारत समेत पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर असर पड़ रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने हाल के दिनों में यूएई और सऊदी अरब पर सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन गए हैं।
इधर, भारत इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाए हुए है। भारत, जो इस समय BRICS का अध्यक्ष है, ने सभी सदस्य देशों को मई में होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक और सितंबर में प्रस्तावित 18वें शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है।ईरान लगातार भारत से BRICS मंच पर अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा करने की मांग कर रहा है, लेकिन भारत ने अभी तक इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है।
इसकी बड़ी वजह यह है कि ईरान, BRICS के अन्य सदस्य देशों—यूएई और सऊदी अरब—पर भी हमले कर रहा है, जो भारत के करीबी साझेदार हैं।स्थिति फिलहाल बेहद संवेदनशील बनी हुई है और वैश्विक स्तर पर इसके असर को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।


