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Oil Palm Subsidy: ऑयल पाम से प्राप्त पाम ऑयल का उपयोग मुख्य रूप से खाद्य तेल के रूप में किया जाता है. इसके अलावा कॉस्मेटिक और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसका उपयोग होता है. भारत में इसकी मांग अधिक होने और बड़े पैमाने पर आयात किए जाने के कारण घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने को महत्व दिया जा रहा है. इससे किसानों के लिए एक नई व्यावसायिक फसल का विकल्प तैयार हो सकता है. ऑयल पाम की खेती पर सरकार मुफ्त पौधे के साथ-साथ अनुदान भी दे रही है..
बिलासपुर: किसानों को पारंपरिक खेती के साथ नई और लाभकारी फसलों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की ओर से ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. यह एक प्लांटेशन क्रॉप है, जिससे खाद्य तेल के साथ कॉस्मेटिक और अन्य औद्योगिक उत्पादों में भी उपयोग होने वाला पाम ऑयल प्राप्त होता है. भारत में पाम ऑयल की बड़ी मात्रा में आयात होने के कारण केंद्र सरकार इसका घरेलू उत्पादन बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है. इसी उद्देश्य से किसानों को ऑयल पाम लगाने के लिए निशुल्क पौधे देने के साथ-साथ बागान विकास, इंटरकल्चर मेंटेनेंस, बोर और फेंसिंग जैसे विभिन्न घटकों पर अनुदान का लाभ दिया जा रहा है. खास बात यह है कि इस योजना में खेती के क्षेत्रफल की कोई सीमा तय नहीं है. किसान एक हेक्टेयर से लेकर 10 या 100 हेक्टेयर तक में ऑयल पाम की खेती कर सकते हैं और पात्रता के अनुसार सभी लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
उद्यान विभाग बिलासपुर के उपसंचालक कमलेश दीवान के अनुसार, ऑयल पाम की खेती में किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता उनकी उपज की बिक्री को लेकर होती है. इस योजना में किसानों को इस समस्या से भी राहत मिलेगी. ऑयल पाम के पौधे लगाने के करीब 3 से 4 साल बाद जब फल आने लगेंगे, तब भारत सरकार और राज्य शासन के साथ अनुबंधित कंपनी किसानों के खेतों से ही उत्पादन की खरीदी करेगी.
किसानों को निशुल्क मिलेंगे पौधे
योजना के तहत किसानों को ऑयल पाम के पौधे निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इसके साथ ही बागान तैयार करने और उसके रखरखाव से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए भी शासन की ओर से अनुदान दिया जा रहा है. इससे किसानों पर शुरुआती लागत का बोझ कम होगा और वे बड़े क्षेत्र में भी ऑयल पाम का प्लांटेशन विकसित कर सकेंगे.
इंटरकल्चर और रखरखाव पर भी अनुदान
ऑयल पाम की खेती में केवल पौधे उपलब्ध कराने तक ही योजना सीमित नहीं है. इंटरकल्चर मेंटेनेंस, बोरवेल और फेंसिंग जैसे आवश्यक घटकों पर भी किसानों को अनुदान का प्रावधान है. इससे बागान के विकास और सिंचाई जैसी जरूरतों को पूरा करने में किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी.
जितना बड़ा क्षेत्र, उतना अधिक लाभ
इस योजना की खासियत यह है कि किसान कितने क्षेत्र में ऑयल पाम लगाएंगे, इसकी कोई निर्धारित सीमा नहीं है. किसान अपनी उपलब्ध भूमि और क्षमता के अनुसार 1 हेक्टेयर, 10 हेक्टेयर या इससे भी अधिक क्षेत्र में खेती कर सकते हैं. पात्रता के अनुसार लगाए गए क्षेत्र पर योजना के विभिन्न लाभ और अनुदान प्राप्त किए जा सकेंगे.
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