सामूहिक भोज में खाद्य सुरक्षा पर सवाल: उड़ीना गांव में त्रयोदशी भोज के बाद करीब एक हजार लोग बीमार

दतिया। दतिया जिले की भांडेर तहसील के उड़ीना गांव में शोक का आयोजन अचानक चिंता और अफरा-तफरी में बदल गया। त्रयोदशी भोज में शामिल होने वाले करीब एक हजार ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई। इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में बड़े सामूहिक भोज के दौरान खाद्य सुरक्षा की अनदेखी का मुद्दा फिर उठा दिया है।शोक सभा से बीमारी तकगांव के तिलक सिंह यादव के बुजुर्ग पिता एदल सिंह पटेल का बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनके निधन के बाद 15 अक्टूबर को त्रयोदशी का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें आसपास के बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। भोजन के साथ मिठाई के तौर पर रसगुल्ले भी परोसे गए।भोजन के कुछ समय बाद कई लोगों को उल्टी, पेट दर्द और सिरदर्द की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार लोगों की संख्या बढ़ती गई और गांव में चिंता का माहौल बन गया।खोया खराब होने की आशंकाग्रामीणों के बीच चर्चा है कि रसगुल्ले बनाने में इस्तेमाल किया गया खोया खराब था। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। असली कारण भोजन के नमूनों की जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।अस्पताल पहुंचे मरीजकुछ मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल, इंदरगढ़ और भांडेर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया।स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया शिविरसूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम शनिवार दोपहर उड़ीना गांव पहुंची और शिविर लगाकर बीमार ग्रामीणों का उपचार किया। टीम ने गांव में ही कई मरीजों की जांच की और जरूरी इलाज दिया।बीएमओ का बयान: हालात काबू मेंभांडेर के बीएमओ डॉ. जयंत यादव ने बताया कि ग्रामीणों को मुख्य रूप से पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई थी। सूचना मिलते ही गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर सभी का इलाज किया गया। जांच के दौरान किसी मरीज में गंभीर लक्षण नहीं मिले। उनके मुताबिक फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किसी को गंभीर समस्या नहीं है।बड़े भोज में क्यों जरूरी है सावधानीइस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि शादी, तेरहवीं या अन्य सामाजिक आयोजनों में सैकड़ों-हजारों लोगों के लिए खाना बनाते समय साफ-सफाई और सामग्री की गुणवत्ता पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। आमतौर पर विशेषज्ञ ये सावधानियां सुझाते हैं:दूध से बनी चीजें, जैसे खोया, पनीर और मावा, भरोसेमंद दुकान से ही लें।मिठाइयां बनाने के बाद उन्हें साफ और ढके स्थान पर रखें।भोजन बहुत पहले बनाकर न रखें, खासकर गर्मी और उमस के मौसम में।पीने के पानी और बर्तनों की सफाई का ध्यान रखें।परोसने से पहले भोजन का स्वाद या गंध संदिग्ध लगे तो उसे न परोसें।आगे क्याफिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नजर गांव की स्थिति पर बनी हुई है। राहत की बात यह है कि किसी मरीज की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि बीमारी की असली वजह क्या निकलती है। यदि जांच में खोया या मिठाई में खराबी की पुष्टि होती है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होने की मांग उठ सकती है। तब तक ग्रामीणों को सलाह है कि किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।

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