नरसिंहपुर। मां की गोद में सिर रखकर सोते हुए बेटे को देखकर एक मां को जो सुकून मिलता है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है… लेकिन सोचिए, उस बेटे की कहानी क्या होगी, जिसने देश की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी… और आज उसकी प्रतिमा मां दुर्गा की गोद में इस तरह विराजमान है, मानो वीर सपूत अपनी मां की गोद में सुकून की नींद सो रहा हो…ये तस्वीर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा स्थित पलोटन गंज के शक्तिधाम की है, जहां शहीद आशीष शर्मा की इस अनोखी प्रतिमा ने लोगों को भावुक कर दिया है… कोई इसे देखकर नमन कर रहा है, तो किसी की आंखें नम हो रही हैं..
ये सिर्फ एक प्रतिमा नहीं… ये उस बेटे की कहानी है, जिसने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया… और उस मां के आंचल का प्रतीक है, जिसकी गोद में आज उसका वीर बेटा हमेशा के लिए सुकून से सोता हुआ दिखाई दे रहा है…मां दुर्गा की विशाल प्रतिमा… उनके चरणों के पास बैठा शेर… और मां की गोद में सिर रखकर लेटे शहीद आशीष शर्मा… इस दृश्य को इस तरह गढ़ा गया है कि इसे देखने वाला कुछ पल के लिए ठहर जाता है… चेहरे पर शांति है, आंखें बंद हैं, लेकिन वर्दी पर लगे निशान उस वीरता की कहानी कहते हैं, जो कभी भुलाई नहीं जा सकती…लेकिन इस प्रतिमा के पीछे जिस शख्स की कहानी है, वो नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा क्षेत्र के बोहानी गांव के रहने वाले थे… मध्यप्रदेश पुलिस की हॉक फोर्स में निरीक्षक आशीष शर्मा…
19 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव क्षेत्र के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई… इसी मुठभेड़ में आशीष शर्मा गंभीर रूप से घायल हो गए… इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया और देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।शक्तिधाम पहुंचने वाले श्रद्धालु इस प्रतिमा को देखकर भावुक हो रहे हैं… किसी के लिए यह मां दुर्गा का वात्सल्य है, तो किसी के लिए देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले बेटे के प्रति सम्मान…
प्रतिमा की बारीकियां और शहीद की वर्दी में दिखाई गई आकृति लोगों को कुछ पल रुककर सोचने पर मजबूर कर रही है…कहते हैं, कुछ कहानियां शब्दों से नहीं, तस्वीरों से कही जाती हैं… गाडरवारा के शक्तिधाम में बनी यह प्रतिमा भी ऐसी ही एक कहानी कह रही है… एक ओर मां दुर्गा का आशीर्वाद है, दूसरी ओर वर्दी में देश के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देने वाला बेटा…आशीष शर्मा अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शहादत, उनका साहस और देश के प्रति उनका समर्पण हमेशा याद रखा जाएगा… मां की गोद में सोते इस वीर सपूत की प्रतिमा शायद यही कह रही है कि शरीर भले ही मिट्टी में मिल जाए, लेकिन देश के लिए दिया गया बलिदान कभी नहीं मरता…


