गुना । क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं, आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती में भाई-भतीजावाद और परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर के बाहर जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। बाद में परिषद के जिला संयोजक अंकित शर्मा के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। इसमें कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. किशन यादव को पद से हटाने, पूरे मामले की ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई।ABVP ने अपने ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां सरकारी धन के उपयोग और नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। परिषद का आरोप है कि पुरानी आउटसोर्स कंपनी को पारदर्शी ई-निविदा प्रक्रिया अपनाए बिना हटाया गया और नई एजेंसी के माध्यम से कुलगुरु के कथित करीबियों एवं रिश्तेदारों को नियुक्तियां दी गईं। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों के बिना नियमित रूप से कार्यस्थल पर उपस्थित हुए वेतन लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। वहीं, लंबे समय से काम कर रहे पुराने और पात्र कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने के फैसले पर भी परिषद ने सवाल खड़े किए हैं।प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। परिषद का कहना है कि शासन द्वारा प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारियों को विश्वविद्यालय में जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई और उन्हें वापस लौटा दिया गया। इससे विश्वविद्यालय के वित्तीय कामकाज में सरकारी निगरानी और पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका है।वहीं, विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े परीक्षा प्रबंधन को लेकर ABVP ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि गोपनीय परीक्षा कार्य निजी और आउटसोर्स कर्मचारियों को सौंपे गए। प्रश्नपत्रों में गलतियां, मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं और परीक्षा परिणामों में विसंगतियों के कारण विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ा। परिषद ने जून 2026 की परीक्षाएं निरस्त होने का हवाला देते हुए पूछा कि आखिर इन अव्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा और विद्यार्थियों के समय एवं भविष्य के नुकसान की भरपाई कैसे होगी।इसके अलावा अतिथि विद्वानों की नियुक्तियों में यूजीसी के नियमों और आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है। वाहनों के टेंडर में गड़बड़ी, डीजल के लाखों रुपये के कथित गबन, फर्जी लॉगबुक और बिना फिटनेस एवं बीमा के वाहनों के संचालन जैसे मामलों की जांच की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।परिषद ने छात्र सुविधाओं को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। आरोप है कि कार्यपरिषद से स्वीकृति मिलने के बावजूद पुस्तकालय की किताबें, कंप्यूटर, आरएफआईडी प्रणाली, डिजिटल बोर्ड, प्रयोगशाला उपकरण, जनरेटर और नई बस जैसी छात्रहित की योजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया गया। वहीं, एआई और डिजिटल कक्षाओं के नाम पर विद्यार्थियों से वसूली गई फीस का अलग से ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही कुलगुरु की नियमित प्राध्यापक पद पर 10 वर्ष के अनुभव संबंधी मूल सेवा पुस्तिका का सत्यापन कराने की मांग भी उठाई गई।ABVP ने राज्यपाल, उच्च शिक्षा विभाग, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW और लोकायुक्त से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिषद ने प्रशासन को 7 कार्यदिवस का अल्टीमेटम देते हुए प्राथमिकी दर्ज करने, संबंधित मूल दस्तावेज सुरक्षित रखने और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक कुलगुरु को प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियों से वंचित कर निलंबित करने की मांग रखी है।वही तात्याटोपे यूनिवर्सिटी के एक्जिक्यूटिव काउंसल जो है उन्होंने एक माह का समय मांगा है उन्होंने तत्काल प्रभाव से टीम गठित कर दी है हम एक महीने में इस पर कार्यवाही करेंगे ,इस कारण एबीवीपी ने आंदोलन को अभी रोक दिया गया है।परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में कार्यवाही नहीं हुई तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर तेज किया जाएगा। साथ ही उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी की जाएगी।बाइट – दिव्यांग बख्शी ABVP मध्यभारत प्रांत सहमंत्री


