तालबेहट/कड़ेसराकलां। बुधवार को बेतवा नदी के किनारे ग्राम कड़ेसकराकलां और थानागांव समेत आसपास तेज बरसात के साथ ओले गिरने से किसानों की फसलों को नुकसान हुआ है। क्षेत्र के अन्नदाता कई वर्षों से प्राकृतिक आपदा झेलते चले आ रहे हैं। कभी सूखे से किसान की फसलों को नुकसान हुआ तो कभी अतिवृष्टि और कभी बेमौसम बरसात व ओलावृष्टि ने किसानों के अरमान चकनाचूर किए हैं। इस बार फसल काफी अच्छी है। किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद है। लेकिन, शनिवार को तेज हवाओं के साथ बरसात होने से कई गांवों में किसानों की फसलें खेतों में गिर गई थीं। अभी किसान का यह जख्म भरा नहीं था कि बुधवार को ग्राम कड़ेसराकलां, थानागांव सहित बेतवा नदी के किनाने ओले गिरे और बरसात हुई। इससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ।ईश्वर का शुक्र था कि इन ओलों की चपेट में कोई किसान नहीं आया। जिस क्षेत्र में ओले गिरे हैं, वहां दिन में बहुत कम लोग खेतों पर रखवाली करते हैं। तेज बरसात से कई खेतों में पानी भर गया।
मैंने बड़ी मुश्किल से पैसा एकत्रित करके तीन एकड़ के खेत में गेहूं की फसल बो रखी थी। जो परिवार के गुजर बसर का सहारा थी। ओले गिरने से फसल बर्बाद हो गई है।
– रामस्वरूप कुशवाहा
दिन में करीब चार बजे मौसम में अचानक ऐसा बदलाव मैंने पहले कभी नहीं देखा। ओलों एवं तेज बरसात से गेहूं की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मेरे पास दस एकड़ जमीन है, इसलिए मेरा अधिक नुकसान हुआ है।
– रघुवीर यादव
इससे पहले मेरी उड़द की फसल अतिवृष्टि का शिकार हो गई थी और अब बची हुई उम्मीद इस फसल से थी। लेकिन, बुधवार को बेमौसम ओले गिरने से बर्बाद हो गई।
– भगवानदास अहिरवार
अभी किसी ने ओले गिरने की सूचना नहीं दी है। फिर भी राजस्व कर्मचारियों को मौके पर भेजकर सर्वे कराऊंगा।
– मो कमर, एसडीएम
मैं मीटिंग में जिला मुख्यालय पर हूूं। ओले गिरने की सूचना काफी देर से मिली। इस कारण बृहस्पतिवार को ही सर्वे कराया जा सकेगा। इसके बाद ही फसल के नुकसान का आकलन किया जा सकेगा।
– श्री कृष्ण, तहसीलदार