नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने COVID-19 डेटा सेंटर की स्थापना की है. इसमें दुनिया भर के देशों का कोरोना से संबंधित डेटा इकट्ठा किया जा रहा है और इसी के आधार पर कोरोना से लड़ने की रणनीति बनाई जा रही है.
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इस डाटा सेंटर से कोरोना वायरस के खिलाफ रोड मैप तैयार करने में बड़ी बड़ी मदद मिल रही है. विदेश मंत्रालय ने COVID-19 नाम से अलग से सेल का गठन किया है. इसमें 75 अधिकारी 24/7 काम कर रहे हैं, जो विदेशों के साथ कोरोना से संबंधित मामलों में कॉर्डिनेट कर रहे हैं.
मेडिकल इक्विपमेंट्स की जरूरत युद्ध स्तर पर पूरी की जा रही
भारत में प्रधानमंत्री केयर फंड में विदेशों से भी डोनेशन स्वीकार करने का फैसला किया है. दुनियाभर में फैले अभियानों के जरिए भारत कोरोना के लिए जो भी मेडिकल इक्विपमेंट्स की जरूरत है, वह युद्ध स्तर पर पूरी की जा रही है. हम बड़े पैमाने पर ये चीजें खरीद भी रहे हैं और जो मदद के तौर पर भेज रहा है, उसको भी स्वीकार कर रहे हैं. इसमें पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट्स यानी पीपीई वेंटिलेटर जैसी जरूरत की चीजें लाई जा रही हैं.
तबलीगी जमात के मामले में विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि जिन नियमों का उल्लंघन किया गया है, उनको लेकर संबंधित एजेंसियां कानूनी कार्रवाई कर रही हैं. विदेश मंत्रालय की जो भी इसमें जरूरत होगी, वह जानकारी मुहैया कराएगा.
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वीजा अवधि बढ़ाने की अपील
प्रधानमंत्री ने दुनिया के 10 प्रमुख नेताओं के साथ टेलीफोन पर बातचीत की है. आपस में तालमेल बढ़ाने और एक दूसरे की मदद करने पर चर्चा हुई है. विदेश सचिव भी लगातार अलग-अलग देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं. अमेरिका में जिन भारतीयों का वीजा खत्म हो गया है. उनके वीजा अवधि बढ़ाने की अपील भारत सरकार ने की है. इस मामले में भारत लगातार अमेरिका से बातचीत कर रहा है.
सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि विदेशों में जहां भी अभी भी भारतीय फंसे हुए हैं. कोरोना के लॉकडाउन चलते भारत सरकार का फोकस उनको निकालकर भारत लाने पर है. इसके लिए प्रयास जारी हैं. विदेशों में फंसे भारतीयों को लगातार सहायता पहुंचाई भी जा रही है.
ईरान से जितने भी भारतीयों को लाया गया है. सभी के सैंपल की जांच करने के बाद ही जो लोग नेगेटिव थे, उनको लाया गया है. इनमें जो ठीक थे, अब उन्हें घर भेज दिया गया है. वहीं जो पॉजिटिव मामले थे, उनका इलाज किया जा रहा है.
सार्क देशों ने कोरोना से लड़ाई के लिए जो फंड बनाया था वह ऑपरेशनलाइज हो गया है. विदेश मंत्रालय की कोविड सेल हेल्पलाइन ने अभी तक विश्व भर से आए 3300 टेलीफोन कॉल के जवाब दिए हैं और 25 सौ ईमेल का भी जवाब दिया जा चुका है.

