नई दिल्ली: कोरोना वायरस (coronavirus) संक्रमण दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है. वहीं इस वायरस के खिलाफ लड़ाई में फ्रंट लाइन पर हैं डॉक्टर्स. ये दिन रात अपनी जान की परवाह किए बगैर मरीजों के इलाज में जुटे हैं. ऐसे ही एक डॉक्टर हैं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री लियो वरडकर (Leo Varadkar) जो देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब खुद फ्रंट लाइन पर उतरे हैं. राजनीति में आने से पहले वह डॉक्टर थे और अब कोरोना के खिलाफ जंग में खुद मोर्चे पर हैं.
बता दें कि आयरलैंड डॉक्टरों की कमी का सामना कर रहा है और यहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील की है कि जो हेल्थ एक्सपर्ट्स अभी अपनी सेवाएं नहीं दे रहे, वो खुद को दोबारा हेल्थ सर्विस के लिए रजिस्टर करवाएं.
हर हफ्ते एक शिफ्ट में काम करेंगे
41 साल के पीएम वरडकर के बारे में सबसे खास बात ये है कि वह भारतीय मूल के हैं. पीएम वरडकर के पिता भारतीय डॉक्टर थे, जबकि मां आयरलैंड की नर्स थीं. वहीं कैथोलिक देश आयरलैंड में वह पहले गे प्रधानमंत्री हैं. आयरलैंड के पीएम लियो अपने देशवासियों के लिए एक बार फिर अपने डॉक्टरी के पेशे में लौटे हैं. उन्होंने देश की हेल्थ सर्विस में डॉक्टर के रूप में खुद को दोबारा रजिस्टर करवाया है. वह इस महामारी के प्रकोप से लड़ने में हर हफ्ते एक शिफ्ट में काम करेंगे.
राजनीति में आने से पहले 7 सालों तक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर
राजनीति में आने से पहले वरडकर 7 सालों तक एक प्रैक्टिसिंग डॉक्टर रहे हैं. वह डबलिन के सेंट जेम्स अस्पताल और कोनोली अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के तौर पर काम कर चुके हैं. लियो ने खुद ये प्रस्ताव दिया कि जिस क्षेत्र में उन्हें स्पेशियलाइजेशन मिला हुआ है, उसमें वह अपनी सेवाएं देना चाहते हैं.
यहां बता दें कि पीएम लियो वरडकर के परिवार के कई लोग और उनके दोस्त भी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं. प्रधानमंत्री इस मुश्किल वक्त में अपने देश को सेवाएं देना चाहते हैं. डॉक्टर के तौर पर वह ऐसे लोगों को फोन पर सलाह देंगे, जो कोरोना वायरस से संक्रमित हैं.
आयरलैंड में कोविड 19 से संक्रमित लोगों की संख्या 5,000 तक पहुंच गई हैं. कोरोना से अब तक यहां 158 लोगों ने अपनी जान गंवाई है.


