- सांसद निधि रोकने पर विपक्षी दल नाखुश
- कहा- सांसदों का वेतन और काट लिया जाए
- सरकार ने लिया 2 साल की निधि रोकने का फैसला
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड बनाया है, जिसमें देश के तमाम लोग फंड दे रहे हैं. इस बीच सांसदों और मंत्रियों के वेतन में कटौती के अलावा एमपीलैड (MPLAD) यानी सांसद निधि भी खत्म कर दी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की मीटिंग में ये फैसला किया गया है, लेकिन विपक्षी दलों के नेता इस फैसले से खुश नहीं हैं.
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने एमपीलैड स्कीम दो साल के लिए रोकने का फैसला गलत ठहराया है. लोकसभा में कांग्रेस के नेता सदन अधीर रंजन चौधरी ने एमपीलैड स्थगन को अन्याय करार दिया है. उन्होंने कहा है कि सरकार चाहे तो सांसदों की और ज्यादा सैलरी काट ले, लेकिन सांसद निधि को इस तरह रोकना सही नहीं है, इस पर फिर से विचार होना चाहिए.
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कांग्रेस के साथ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने भी सरकार के इस फैसले पर एतराज जताया है. टीएमसी ने कहा है कि एमपीलैड स्कीम को रद्द करना सरकार का एक मनमाना तरीका है और कोरोना वायरस महामारी से लड़ाई के लिए काफी संसाधन हैं.
आम आदमी पार्टी भी भड़की
एमपीलैड के मोदी सरकार के फैसले से आम आदमी पार्टी भी खफा है. पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मसले पर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा है, ‘सांसदों-मंत्रियों का वेतन काटना उचित है लेकिन सांसद निधि से तो हर सांसद कोरोना संकट से निपटने के लिये अपने-अपने क्षेत्र में वेंटिलेटर, मास्क, रोज़गार सृजन आदि में उक्त धनराशि का इस्तेमाल कर सकता था इस विषय पर सांसदों से चर्चा करनी चाहिये थी.’
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यानी एमपीलैड पर रोक लगाने के मोदी सरकार के फैसले का विपक्षी दलों ने खुलकर विरोध किया है. बता दें कि मोदी कैबिनेट ने 6 अप्रैल को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड) को दो वर्षों (2020-21 और 2021-22) के लिए संचालित न करने का निर्णय लिया है. सरकार ने कहा है कि इस योजना के पैसे का का उपयोग कोरोना से जंग में किया जाएगा.

