लॉकडाउन: संकट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हजारों मुंशी, कैसे चलाएं घर का खर्च?allahabad high high court munchies families suffering from financial crises during lockdown upsd upns | uttar-pradesh – News in Hindi

लॉकडाउन: संकट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हजारों मुंशी, कैसे चलाएं घर का खर्च?

संकट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के हजारों मुंशी (फाइल फोटो)

लॉकडाउन की घोषणा के पहले से ही हाईकोर्ट परिसर को सैनेटाइजेशन के लिए बंद कर दिया गया था. बाद में देशव्यापी लॉकडाउन की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद हाईकोर्ट भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है.

प्रयागराज. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) को फैलने से रोकने के लिए देश भर में 21 दिनों का लॉकडाउन (Lockdown) लागू है. वहीं इस वैश्विक महामारी से पूरा देश ही जूझ रहा है और इसमें हर वर्ग के कामगार शामिल है. लेकिन वकीलों के साथ कोर्ट में काम कर रहे और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों में शुमार मुंशियों (एडवोकेट्स क्लर्क) की भी परेशानी किसी से कम नहीं है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में लगभग 18 हजार के करीब प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की संख्या है. सभी वकीलों के पास अपने मुंशी नहीं होते लेकिन वे वकील भी अपने साथी के मुंशी से काम लेते रहते हैं और काम के एवज में उन्हें पैसे देते हैं. लेकिन अब हजारों मुंशी तमाम कामगार लोगों की तरह बेरोजगार है.

लॉकडाउन की घोषणा के पहले से ही हाईकोर्ट परिसर को सैनेटाइजेशन के लिए बंद कर दिया गया था. बाद में देशव्यापी लॉकडाउन की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद हाईकोर्ट भी अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है. इस बंदी के चलते हाईकोर्ट के जूनियर वकीलों को परेशानी तो है ही. उनसे भी अधिक परेशानी हाईकोर्ट के लगभग 4 हजार के करीब मुंशियों के परिवारों के सामने आ गई है. ये मुंशी अपने प्रतिदिन की आमदनी से ही अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. कोर्ट खुलने पर ही इन मुंशियों की आमदनी होती है और बंद रहने पर बंद हो जाती है.

अचानक देशव्यापी लॉकडाउन के चलते इन मुंशियों व इनके परिवार के भरण-पोषण की समस्या खड़ी हो गयी है. सरकार तक इनकी तकलीफें पहुंचाने वाला कोई संगठन भी नहीं है. न ही कोई ऐसी संस्था है जो इनकी परेशानियों को सरकार के सामने उठाए. इन मुंशियों का ऐसा कोई बड़ा संगठन भी नहीं होता कि वे जिसके माध्यम से अपनी समस्या को हल कर सके. अब तो इनके सामने आम लोगों को मिल रही सरकारी राहतों के अलावा और कोई चारा नहीं है, जिससे ये अपने परिवार की भूख मिटा सकें.

मुंशियों की दशा पर विचार कर इनकी तकलीफ के निदान का हल ढूंढने वाला फिलहाल कोई दिख रहा है. यही समय है कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोगों को अभी वक्त रहते इनकी भी परेशानी का कोई शीघ्र हल निकालना होगा.ये भी पढ़ें:

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First published: April 7, 2020, 9:20 AM IST




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