Edited By Somendra Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

प्राणायाम किसी भी व्यक्ति के द्वारा रोज सुबह या शाम के समय बड़ी आसानी से किया जा सकता है। प्राणायाम की कुछ ऐसी भी मुद्राएं हैं जिनका अभ्यास आप किसी भी वक्त कर सकते हैं। यह हमारे शरीर की विभिन्न कार्यप्रणाली को सुचारू रूप से चलाए रखने में मदद करती है। इसके अलावा प्राणायाम हमें कई प्रकार के रोगों से भी बचाए रखता है। लेकिन क्या आपको पता है कि प्राणायाम के दौरान तीन बातों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है? इन बातों को नजरअंदाज करने पर आपको इसका दुष्परिणाम उठाना पड़ सकता है। यहां आपको आज उन्हीं तीन बातों के बारे में बताया जा रहा है।
श्वास लेने की प्रक्रिया से जुड़ी है यह बात

प्राणायाम के दौरान जिन तीन बातों का या फिर प्रक्रिया का आपको विशेष ध्यान रखना है दरअसल, वह श्वास लेने से जुड़ा हुआ है। प्राणायाम करने से आपके शरीर को जो भी फायदा होता है, उसका सीधा असर आपके द्वारा ली गई श्वास और उसे छोड़ने के तरीके पर निर्भर करता है। इनमें अगर ज्यादा लापरवाही बरती जाती है तो यह स्वास्थ्य के लिए नकारात्मक परिणाम भी उत्पन्न कर सकता है। श्वास को लेने, रोककर रखने और उसे छोड़ने की प्रक्रिया को तीन विशेष नाम से जाना जाता है, जिनके बारे में नीचे बताया जा रहा है।
पूरक
प्राणायाम के दौरान नियंत्रित गति के साथ श्वास को अंदर लेने की प्रक्रिया ही पूरक कहलाती है। इसके जरिए आपके शरीर को पर्याप्त रूप से ऑक्सीजन की मात्रा मिलती है और आपका प्राणायाम भी अपने फायदे बेहतरीन रूप से दिखा पाता है। इसलिए प्राणायाम के दौरान जब भी अंदर की ओर श्वास खींचे तो इस बात पर विशेष ध्यान दें कि आपके द्वारा श्वास अंदर लेने की क्रिया नियंत्रित हो।
कुम्भक
जब किसी व्यक्ति के द्वारा अंदर की हुई श्वास को उसकी क्षमता अनुसार रोककर रखा जाता है तो यह स्थिति कुम्भक कहलाती है। कुछ ऐसे प्राणायाम हैं जिनमें कुछ देर तक श्वास को रोककर रखा जाता है। यह फेफड़ों को मजबूत बनाने का कार्य करने के साथ-साथ उस प्राणायाम का बेहतरीन परिणाम दिखाते हैं।
रेचक
पूरक और कुम्भक के बाद प्राणायाम की तीसरी मुख्य क्रिया रेचक होती है। रेचक के अंतर्गत प्राणायाम करने वाले व्यक्ति के अंदर ली हुई श्वास को एक समान गति से बाहर निकालने का काम होता है। कई लोग ऐसे भी होते हैं जो प्राणायाम करने के दौरान पूरक और कुम्भक का तो विशेष ध्यान देते हैं लेकिन अंत में वह तेजी से अपनी श्वास को बाहर छोड़ देते हैं। यह आपके शरीर पर प्राणायाम का विपरीत असर डाल सकता है। इसलिए रेचक की प्रक्रिया को भी सामान्य रूप से ही करें।
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