- प्रवासी मजदूरों की वजह से बिहार में बढ़े कोरोना के केस
- प्रदेश में ठीक होने वालों का प्रतिशत भी अच्छा
बिहार में प्रवासी मजदूरों का वापस आना लगातार जारी है. अबतक एक लाख से ज्यादा मजदूर कई खेप में श्रमिक ट्रेन से ब्लॉक क्वारंटीन सेन्टर्स पहुंच चुके हैं. जबकि लाखों आने वाले हैं. हालांकि जब इन मजदूरों का रेंडम कोरोना टेस्ट करिया गया तो परिणाम चौकाने वाले थे. अभी तक उन्हीं मजदूरों की जांच की गई है जो रेड जोन से आए थे. इनमें से अब तक 85 मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इससे पहले पैदल या अन्य किसी रास्ते से बिहार पहुंचने वाले 145 मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. यानी अब तक कुल 653 प्रवासी मजदूर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. ये आंकड़े कुल संक्रमित केसों का 35 प्रतिशत है.
बेगूसराय के जिलाधिकारी का कहना है कि पिछले तीन दिनों में 151 मजदूरों का सैंपल जांच के लिए भेजा गया. जिसमें से 73 की रिपोर्ट आई है उनमें से 13 पॉजिटिव पाए गए हैं.
बेगूसराय के जिलाधिकारी अरविन्द कुमार वर्मा ने बताया कि 22 सौ से ज्यादा प्रवासी मजदूर अलग-अलग साधनों से बेगूसराय पहुंचे हैं. इन्हें जिले की 121 क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है. सरकार के निर्देश मिलने के बाद रेड जोन जिले से आने वाले प्रवासी मजदूरों की रेंडम जांच कराई जा रही है. पिछले 3 दिनों में 73 और 78 मजदूरों का सैंपल भेजा गया था जिसमें से 73 में से 13 पॉजिटिव मामले सामने आए हैं जबकि अन्य 78 सैंपल की रिपोर्ट्स आनी बाकी है.
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महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से आये इस्लामिक मदरसे के बच्चे काफी समय से लॉकडाउन में फंसे थे, स्पेशल ट्रेन से सहरसा पहुंचने पर खुश हैं. हालांकि इनके साथ आने वाले कई बच्चे अपने साथ कोरोना वायरस भी ले आए हैं. केवल सहरसा के 180 बच्चे हैं. इनमें से 40 बच्चों का सैंपल रेंडम टेस्ट के लिए भेजा गया था. जिनमें से 28 की रिपोर्ट आ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक 28 बच्चों में से सात कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं. इससे पहले जब ट्रेन आई थी तो आठ बच्चों को आईसोलेशन में रखा गया था. इनमें से तीन कोरोना पॉजिटिव पाये गए थे.
सहरसा के जिलाधिकारी कौशल कुमार का कहना है कि पहले से तीन संक्रमित थे अब सात नए मामले सामने आए हैं. जबकि 12 की रिपोर्ट अभी पेंडिंग हैं. ये बच्चे छह मई को नंदुरबार से ट्रेन में आए थे. इसमें कुल 1,015 बच्चे आए थे. जो सहरसा के अलावा मधेपुरा, बेगूसराय सुपौल और खगड़िया के रहने वाले थे. इन सभी बच्चों को होम क्वारंटीन में रखा गया था. मधेपुरा में सात बच्चे कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. मुजफ्फरपुर में गुजरात और अन्य जगहों से आए छह मजदूर पॉजिटिव पाए गए.
यही वजह है कि बिहार सरकार प्रवासी मजदूरों को जहां हैं वहीं रहने की सलाह दे रहे थे. लेकिन बाद में जब दूसरे राज्यों की मजदूरों की वापसी होने लगी और बिहार में विपक्ष और बीजेपी नेता उनकी वापसी का दबाव बनाने लगे तो सरकार को मजबूरन यह फैसला लेना पड़ा.
अब तक बिहार में 83 श्रमिक ट्रेनों से लगभग 1 लाख आए मजदूरों को विभिन्न प्रखंडो के क्वारंटीन सेंटर्स में रखा गया है और सरकार पहले इनका जांच करा रही है ताकि ये संक्रमण बाहर न फैले.
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बिहार में 54 प्रतिशत कोरोना मरीज ठीक हुए
बिहार में कोरोना का कहर तो बढ रहा है, साथ ही कोरोना संक्रमण से ठीक होने का प्रतिशत भी काफी अच्छा है. बिहार में रविवार को अगर कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कुल संख्या 653 है तो इनमें से 354 लोग ठीक होकर घर वापस जा चुके हैं. यानी कोरोना से ठीक होने का प्रतिशत 54 है जो देश में शायद सबसे ज्यादा हैं.

