नई दिल्ली/इस्लामाबाद: कोरोना संकट (Coronavirus) के बीच अप्रैल के मध्य तक पाकिस्तान एकमात्र ऐसा पड़ोसी देश था, जिसने भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (HCQ) की मांग नहीं की, लेकिन जब हालात बिगड़ने लगे, तो उसने अपनी अकड़ छोड़कर नई दिल्ली के आगे मदद के लिए झोली फैला दी. अप्रैल से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) ने भारत से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था. जिसमें दवाएं भी शामिल थीं, मगर जब कोरोना महामारी से मुकाबले के लिए भारत फार्मेसी लीडर के रूप में उभरा, तो उन्हें अपना आदेश वापस लेना पड़ा. इतना ही नहीं, मौजूदा समय में भी इमरान HCQ के आयात को लेकर कन्फ्यूज हैं.
बैन लगाने-हटाने के इस नाटक में इमरान माहिर हैं. पिछले साल अगस्त में प्रतिबंध के बावजूद पाकिस्तान ने भारत से दवाओं का आयात बंद नहीं किया. सितंबर, 2019 में प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटा दिया गया, और जीवन रक्षक दवाओं की अनुमति दी गई. जिसमें कैंसर, हृदय रोग, एंटी-रेबीज और एंटी-वेन दवाएं शामिल हैं. हालांकि, बैन के बावजूद पाकिस्तान की भारत की दवाओं पर निर्भरता जारी रही. कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि वर्तमान में भी पाकिस्तानी कंपनियां भारत से लगभग 450 विभिन्न दवाएं खरीद रही हैं.
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पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, चोरी-छिपे भारत से आने वाली दवाओं के मामले में इमरान सरकार ने जांच के आदेश दिए थे. लेकिन इसी बीच, उन्होंने चिकित्सा आपूर्ति के लिए भारत पर पाकिस्तान की अत्यधिक निर्भरता की पुष्टि करते हुए प्रतिबंध हटा दिया. अब इमरान खान को कन्फ्यूज प्राइम मिनिस्टर न कहा जाए, तो क्या कहा जाए?
भारत ने हमेशा दिखाई दरियादिली
पाकिस्तान हमेशा से भारत के खिलाफ साजिश रचता रहता है, लेकिन भारत ने कभी उसे दवा उपलब्ध कराने से इंकार नहीं किया. तब भी नहीं जब पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देकर भारत में खूनी खेल खेलता रहा. पाकिस्तान ने खुद भी कभी दवाओं का आयात बंद नहीं किया. क्योंकि वह जानता है कि भारत की दवाओं के बिना उसकी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा जाएंगी. पुलवामा आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया था, लेकिन 2 बिलियन डॉलर से अधिक का दवाओं का निर्यात जारी रहा. यानी भारत ने मानवीय पहलुओं को व्यक्तिगत मनमुटावों से ऊपर रखा.
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बदले में हमें क्या मिला?
लेकिन सवाल यह उठता है कि पाकिस्तान से हमें बदले में क्या मिला, तो इसका जवाब है आतंकवाद. यहां तक कि कोरोना महामारी के बीच भी पाकिस्तान अपनी काली करतूतों से बाज नहीं आ रहा है. मौजूदा वक्त में पाकिस्तान की दो विंग ओवरटाइम कर रही हैं – सेना और आतंकवादी संगठन. पाक सेना शायद दुनिया की एकमात्र ऐसी सेना है जिसने कोरोना संकट के दौरान भी वेतन वृद्धि की मांग की है. जहां तक आतंकी समूहों का सवाल है, वे खुद को रिब्रांड कर रहे हैं. विशेष रूप से, जम्मू और कश्मीर में Resistance Front नाम से एक नया संगठन सामने आया है. रिपोर्टों में कहा गया है, यह संगठन पिछले साल भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद अस्तित्व में आया. इस फ्रंट को लश्कर-ए-तैयबा के तीन शीर्ष आतंकियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है.


