नई दिल्ली: चीन पर आरोप लगता रहा है कि कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत में उसने जानकारियां छिपाईं, जिससे दुनिया भर में संक्रमण फैल गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तो खुलेआम कहा कि कोरोना वायरस, चीन ने लैब में पैदा किया और इसे लेकर उनके पास पर्याप्त सबूत हैं.
और अब चार महीने बाद, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. सोमवार को शुरु हुई विश्व स्वास्थ्य संगठन की सालाना बैठक में शी जिनपिंग ने अपने 11 मिनट के भाषण में मुख्य तौर से तीन बातें बोली, जिनपर विश्वास करना बहुत मुश्किल है.
शी जिनपिंग ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर चीन ने कभी भी दुनिया से कोई जानकारी नहीं छिपाई. जबकि सच ये है कि अमेरिका समेत कई देश कह चुके हैं कि उनके पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि चीन के दबाव की वजह से ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वक्त रहते दुनिया के देशों के लिए कोरोना की चेतावनी जारी नहीं की.
आज शी जिनपिंग ने ये भी कहा कि अगर, चीन कोरोना की वैक्सीन बना लेता है तो वो पूरी दुनिया की जनता का ख्याल रखते हुए, सभी को फ्री में वैक्सीन उपलब्ध करवाएगा, लेकिन सोचने वाली बात ये है कि, दुनिया के देशों ने पैसे देकर चीन से जो PPE किट्स, मास्क और मेडिकल उपकरण खरीदे, जब वो ही इतनी घटिया क्वालिटी के हैं तो चीन की वैक्सीन की क्वालिटी की क्या गांरटी होगी.
शी जिनपिंग ने आज एक और ऐलान किया है. उन्होंने कहा है कि चीन, कोरोना महामारी से आर्थिक और सामाजिक तौर पर प्रभावित विकासशील देशों को 2 बिलियन डॉलर यानी करीब 15 हजार 166 करोड़ रुपए की आर्थिक मदद देगा. यानी चीन अब, पैसे के दम पर ये दिखाने की कोशिश भी कर रहा है कि वो कोरोना महामारी से पीड़ित दुनिया को लेकर कितना चिंतित है.
लेकिन अगर चीन वास्तव में इतना ही चिंतित है, तो उसे कोरोना वायरस के फैलने की अंतर्राष्ट्रीय जांच का समर्थन करना चाहिए था. लेकिन शी जिनपिंग ने आज ऐसा कुछ नहीं किया.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ये बयान, जेनेवा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रही, World Health Assembly की 73वीं सालाना बैठक में दिया है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के फैसले लेने वाली सबसे बड़ी बॉडी है. इस वर्ष कोरोना वायरस की वजह ये बैठक, सिर्फ दो दिन के लिए रखी गई है. ये बैठक ऐसे वक्त में हो रही है जब दुनियाभर में कोरोना के 48 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं और तीन लाख 17 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं. जाहिर है, इस बैठक में कोरोना का मुद्दा छाया रहा.
बैठक के पहले दिन यूरोपियन यूनियन और ऑस्ट्रेलिया समेत करीब 116 देशों ने वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच की मांग का प्रस्ताव रखा है.
जिसमें भारत के साथ बांग्लादेश, कनाडा, रूस, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, Turkey, ब्रिटेन और जापान जैसे देश भी शामिल हैं. हालांकि, इन देशों में अमेरिका का नाम शामिल नहीं है.
इस प्रस्ताव में चीन या वुहान का जिक्र नहीं है. लेकिन ये कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात की जांच करे कि वायरस कहां से पैदा हुआ और जानवर से इंसान में कैसे आया.
सात पन्नों के इस प्रस्ताव में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका की भी जांच की बात कही गई है. संगठन के सदस्य 194 देशों में से दो तिहाई देश, अगर इस मांग के पक्ष में रहते हैं तो मंगलवार को ये प्रस्ताव, बैठक में वोटिंग के लिए रखा जा सकता है.
इससे पहले भी अमेरिका के अलावा जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देश कोरोना वायरस फैलने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के एक अधिकारी ने माना है कि चीनी सरकार ने कोरोना वायरस सैंपल को अन ऑर्थराइज्ड प्रयोगशालाओं में नष्ट करने के लिए तीन जनवरी को एक आदेश जारी किया था. हालांकि दावा किया गया कि नमूनों को एहतियात के तौर पर नष्ट किया गया था, ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके. जाहिर है, कोरोना महामारी के फैलने में चीन की भूमिका संदिग्ध है और चीन जिस तरह से हर आरोप को नकार रहा है, उससे दुनिया का शक गहरा होता जा रहा है.

