
सुष्मिता सेन ने हाल ही में अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में यह बताया था कि उन्हें ऑटो-इम्यून कंडीशन थी और किस तरह से वो इस बीमारी से लड़ीं। इसी के साथ सुष्मिता सेन ने यूट्यूब पर एक वीडियो भी पोस्ट किया है जिसमें वो Nunchaku मार्टिकल आर्ट्स की एक फॉर्म की प्रैक्टिस करती नजर आ रही हैं। इस वीडियो पोस्ट की डिस्क्रिप्शन में उन्होंने लिखा- 2014 में ऑटो-इम्यून कंडीशन से ग्रसित होने के बाद ऐसा लगा कि मेरे अंदर लड़ने के लिए कुछ शेष नहीं रहा है। आखों के नीचे के डार्क सर्कल्स समेत वो एक ऐसा 4 वर्षों का समय था जो मेरे लिए अंधकार भरा है। किसी क्रोनिक डिजीज यानी कि लम्बी बीमारी से लड़ने से ज्यादा मुश्किल कुछ नहीं है। मेरे लिए खुद को हिम्मत देने का या हिम्मत तलाशना बहुत जरूरी हो गया था। इसके बाद मैंने Nunchaku के साथ मैडिटेशन की शुरुआत की।
क्या होता है ऑटोइम्यून डिजीज?
ऑटोइम्यून एक ऐसी स्थिति है, जब आपका इम्यून सिस्टम गलती से आपके ही शरीर पर अटैक करने लग जाता है। आमतौर पर हमारा इम्यून सिस्टम ही हमें बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है और हमें बीमारियों से बचा कर रखता है, लेकिन ऑटो इम्यून जैसी स्थिति में, गलती से इम्यून सिस्टम आपके ही बॉडी पार्ट्स जैसे की जोड़ों, स्किन आदि को अपना दुश्मन समझ बैठता है। इन स्थितियों में इम्यून सिस्टम ही शरीर को बचाने के बजाय हेल्दी सेल्स को खत्म करने लगता है। कुछ ऑटो इम्यून बीमारियां जैसे कि टाइप 1 डॉयबिटीज अग्न्याशय यानी कि पैनक्रिआज को अटैक करता है।
ऑटोइम्यून बीमारी के 80 से ज्यादा प्रकार हैं, इनमें से कुछ नीचे बताए जा रहे हैं। हालांकि, इसके अलावा भी इसकी कई आम बीमारियां है, जिसकी जानकारी हम अलग पोस्ट में डिटेल में साझा करेंगे।
1. टाइप 1 डायबिटीज
अग्नाशय इन्सुलिन हॉर्मोन को बनता है, जिससे ब्लड-शुगर स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इस बीमारी में इम्यून सिस्टम इन्सुलिन बनाने वाले सेल्स पर अटैक कर के उसे खत्म कर देता है। हाई ब्लड-शुगर स्तर से ब्लड वेसल्स को भारी नुकसान हो सकता है और इसके साथ दिल, किडनी, आंखों और जोड़ों को भी भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
2. आर्थराइटिस Rheumatoid arthritis (RA)
इसमें इम्यून सिस्टम जोड़ों पर अटैक करता है। इससे जोड़ों में सूजन, लाल होना, कठोरता यानी स्टिफनेस आदि आ सकता है। यह बीमारी 30 साल और उससे ऊपर के लोगों में आ सकती है।
ऑटोइम्यून के लक्षण:
- थकान
- मांसपेशियों में दर्द
- सूजन
- कम बुखार
- ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
- हाथ और पैरों का सुन होना जा झुनझुनी रहना
- बाल झड़ना
- स्किन रैश
इसी के साथ यह बात ध्यान देने वाली है कि इसमें मौजूद हर बीमारी के अपने अलग-अलग लक्षण भी हैं। जैसे की- टाइप 1 डाइबिटीज में बहुत ज्यादा प्यास, वजन कम होना आदि लक्षण आते हैं। IBD में पेट में दर्द, डायरिया आदि के लक्षण होते हैं। इसमें लक्षण आते-जाते भी रहते हैं।
क्या है डॉक्टर का कहना?
डॉक्टर नवल मेंदीरत्ता, कंसलटेंट, Rheumatology, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च, गुरुग्राम के अनुसार, हमारे शरीर में इम्यून सिस्टम हमारी सुरक्षा का काम करता है। वहीं, कुछ लोगों में इसकी कार्यप्रणाली में गड़बड़ हो जाती है। इसका एक कारण नहीं बताया जा सकता क्योंकि इसमें कई कारण हो सकते हैं। कई बार यह अनुवांशिक होता है। कई बार धूम्रपान, प्रदुषण, वायरल इन्फेक्शन के कारण भी हो जाता है। इसके बाद यह हानिकारक सेल्स बनाने लगता है और अपने ही सिस्टम को अटैक करता है। इससे जोड़ों, गुर्दे, आंखें, फेफड़े, दिमाग आदि पर गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह अधिकतर महिलाओं में होता है।
क्या है इसका बचाव?
डॉक्टर नवल मेंदीरत्ता, कंसलटेंट, Rheumatology, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च, गुरुग्राम के अनुसार, इसे होने से 100 प्रतिशत तक को नहीं रोका जा सकता है क्योंकि इसके बहुत प्रकार और बहुत कारण हैं, लेकिन कुछ ऐसी चीजें जरूर हैं जिनसे ट्रिगर यानी कि इसके होने या बढ़ने को कम किया जा सकता है। धूम्रपान से ऑटोइम्यून बीमारी के बढ़ने की अधिक संभावना रहती है। स्ट्रेस मैनेजमेंट और रोजाना व्यायाम करने से इस बीमारी से कुछ हद तक बचा जा सकता है।
निष्कर्ष: इस बीमारी के 80 से अधिक प्रकार मौजूद हैं। इसके लक्षण एक-दूसरे से काफी हद तक मिलते भी हैं, इसलिए इनका पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। ऑटोइम्यून बीमारी महिलाओं में ज्यादा आम है और यह अधिकतर परिवारों में होती है। जैसे अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी थी तो आपको इस बीमारी के लगने का खतरा अधिक होगा। एंटीबाडीज का पता लगाने वाला ब्लड-टेस्ट इसका पता लगा सकता है।
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