Pregnancy and Lockdown : rise in natural pregnancy during lock down

नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

Lockdown And Pregnancy: लॉकडाउन में बढ़ी नैचरल प्रेग्नेंसी, IVF एक्सपर्ट बता रही हैं संभावित कारणपिछले एक दो-दिन से ऐसी खबरें देखने को मिल रही हैं कि लॉकडाउन के दौरान उन महिलाओं और पुरुषों की सेक्सुअल लाइफ संबंधी समस्या प्राकृतिक रूप से दूर हो गई है, जो इन समस्याओं को दूर करने के लिए ट्रीटमेंट ले रहे थे लेकिन लॉकडाउन के कारण उनका ट्रीटमेंट बीच में ही छूट गया। लेकिन उनमें से कई लोगों की समस्या नैचरल तरीके से लॉकडाउन के दौरान दूर हो गई।

फैमिली टाइम, हॉर्मोनल बैटरमेंट

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आईवीएफ एक्सपर्ट शुचि कालिया का कहना है कि लॉकडाउन के कारण लोगों के पास फैमिली टाइम बढ़ गया। साथ ही लॉकडाउन का स्ट्रेस तो रहा लेकिन डेली रुटीन का जो स्ट्रेस था वो खत्म हो गया… स्ट्रेस एक बड़ा फैक्टर है, जो महिलाओं में ऐग और पुरुषों में स्पर्म की क्वालिटी को डाउन करता है।

ना चाहते हुई भी छूट गई यह आदत

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– जब भी सेहत और प्रेग्नेंसी की बात आती है तो हम हमेशा यही सुझाव देते हैं कि बाहर का खाना ना खाएं। फास्ट फूड से जितना हो सके बचें। लेकिन रुटीन लाइफ में यह सब कम ही लोग फॉलो कर पाते थे।

– जबकि लॉकडाउन के कारण ये सब ऑप्शन बंद हो गए और सभी ने घर पर बना हेल्दी फूड खाना शुरू किया। जब हमारी डायट हेल्दी होती है तो हमारी सेहत भी अच्छी होने लगती है।

घट गया ऑक्सीडेंट इंटेक

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-लॉकडाउन के कारण एक तरफ जहां बाहर के खान के कारण शरीर में होनेवाला ऑक्सीडेंट इंटेक घट गया वहीं पलूशन कम होने के कारण पलूटेंट्स भी शरीर में नहीं गए।

-इसके साथ ही घर के हेल्दी इंवॉयर्मेंट में रहने से महिलाओं और पुरुषों की अंदरूनी सेहत (इंटरनल हेल्थ) में बहुत अच्छा परिवर्तन आया। हम कह सकते हैं कि सेहत से जुड़े जिन फैक्टर्स को ठीक करने के लिए ट्रीटमेंट और आईवीएफ ट्रीटमेंट ले रहे थे, उनकी ये दिक्कतें जरूरी आराम, हेल्दी डायट और साफ हवा के कारण प्राकृतिक रूप से दूर हो गईं।

प्रेग्नेंसी की सबसे बड़ी बाधा हुई दूर

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-यह एक बड़ी वजह है कि अपना आईवीएफ ट्रीटमेंट पूरा ना कर पाई महिलाएं भी लॉकडाउन के दौरान नैचरली प्रेग्नेंट हो गईं। साथ ही जिन पुरुषों को डेली स्ट्रेस और वर्क प्रेशर के कारण स्पर्म काउंट कम होने या इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दिक्कत थी, उनकी समस्या भी दूर हो गई।

-महिलाओं में एग क्वालिटी और पुरुषों में स्पर्म काउंट का लो होना, प्रेग्नेंसी ना हो पाने की मुख्य वजह होते हैं। लॉकडाउन के कारण अचानक सामने आई परिस्थितियों ने इनमें से कई समस्याओं को दूर करने का काम किया। इस कारण प्राकृतिक रूप से प्रेग्नेंसी होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

360 डिग्री बदल गया लाइफस्टाइल

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-कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण लोगों की लाइफस्टाइल अचानक से पूरी तरह बदल गई। हम यह भी कह सकते हैं कि दैनिक जीवन में 360 डिग्री का बदलाव आ गया।

-भरपूर नींद, रोज की भागदौड़ और तनाव से मुक्ति, शुद्ध भोजन, पति-पत्नी का एक-दूसरे को पूरा समय देना और क्वालिटी टाइम स्पेंड करना। इन सब क्रियाओं के कारण शारीरिक और मानसिक रूप से लोगों का स्वास्थ्य बहुत बेहतर हुआ है।

इस उम्र के होते हैं ज्यादातर मरीज

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-डॉक्टर शुचि का कहना है कि आईवीएफ ट्रीटमेंट लेनेवाले मरीजों की उम्र आमतौर पर 30 से 38 साल के बीच होती है। इस उम्र में बच्चा प्लान करने की सबसे बड़ी वजह आज के समय में करियर को प्राथमिकता देना है। और इस उम्र तक आते-आते व्यक्ति अपने करियर को जरूरी ग्रोथ दे चुका होता है।

-यही वजह है कि आज के समय में महिलाएं और पुरुष दोनों ही 35 के बाद बच्चे की प्लानिंग करते हैं। लेकिन जिस तरह की लाइफस्टाइल हम लोग जी रहे हैं उसमें इस उम्र तक आते-आते महिला में एग और पुरुषों में स्पर्म की क्वालिटी घटने लगती है। इस कारण प्रेग्नेंसी में दिक्कत आती है।

इनकी लाइफ में आया बदलाव

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-आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए आमतौर पर वही फैमिली प्रयास करती हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न होती हैं। ऐसे परिवारों में लोगों ने लॉकडाउन का ज्यादातर समय खुद की फिटनेस मेंटेन करने पर इंवेस्ट किया है।

-देखिए, जो लोग आर्थिक रूप से संपन्न हैं, उन्हें लॉकडाउन के दौरान पूरा आराम मिला। उन्होंने डायट अच्छी ली और एक्सर्साइज, योग को नियमित रूप से किया ताकि फिट बन सकें। एक हेल्दी इंसान बने रहने के लिए यही सब चाहिए। जब हम स्वस्थ होते हैं तो नैचरल प्रेग्नेंसी के चांस खुद-ब-खुद बढ़ जाते हैं।

मिलिए अपनी एक्सपर्ट से

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-यह आर्टिकल डॉक्टर शुचि लखनपाल कालिया से बातचीत पर आधारित है। ये M.S.OBGY.D.N.B.डिप्लोमा आर्ट (इंफर्टिलिटी) फैलोशिप इन लैप्रोस्कोपी हैं। ये अवेय आईवीएफ ऐंड फर्टिलिटी सेंटर, राजौरी गार्डन (दिल्ली) में बतौर इंफर्टिलिटी ऐंड लैप्रोस्कोपी कंसल्टेंट कार्यरत हैं। ये पिछले 8 साल से चिकित्सा जगत के इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं।

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