Lockdown: Return of migrant laborers, employment crisis and real estate feud likely to increase – Lockdown: मजदूरों की वापसी से रोजगार का संकट और जमीन-जायदाद के झगड़े बढ़ने की आशंका

Lockdown: मजदूरों की वापसी से रोजगार का संकट और जमीन-जायदाद के झगड़े बढ़ने की आशंका

प्रतीकात्मक फोटो.

आजमगढ़:

Coronsvirus Lockdown: लॉकडाउन के चलते महानगरों से पलायन करके गांव पहुंचने वाले श्रमिकों के लिए मनरेगा ही एक सहारा है. हालांकि यूपी सरकार दक्ष मजदूरों का पंजीकरण कर रही है लेकिन फिलहाल इन श्रमिकों से कोरोना के संक्रमण से लेकर गांव में झगड़ों तक का डर भी प्रशासन को सता रहा है. 

यह भी पढ़ें

मनरेगा के काम सैकड़ों लोग कर रहे हैं. अंबेडकर नगर में कच्ची चेक रोड बनाने के लिए सैकड़ों मनरेगा मजदूर काम पर लगे हैं. दो महीना पहले तक जयपाल पेंटर ठेकेदार के नाम से गांव में जाने जाते थे लेकिन लॉकडाउन में गुड़गांव से लौटने के बाद अब मनरेगा मजदूर बन चुके हैं. पति-पत्नी दोनों मनरेगा में काम करेंगे तब जाकर महीने भर में छह हजार रुपये कमाएंगे. जयपाल ने बताया कि ”पहले गुड़गांव में बीस हजार रुपये तक कमा लेते थे. अब यहां यही काम है. दोनों लोग काम करते हैं, क्या करें.”

जयपाल के साथ ही महानगरों में सालों से भीख मांगकर गुजारा करने वाले लोग भी गांव लौटे हैं. मनरेगा के तहत काम करने वालों की इस कतार में जयपुर से लौटे हैंडीक्राफ्ट कारीगर भी हैं और महानगरों में भीख मांगने वाले गरीब भी. हाल के दिनों में अंबेडकर नगर के तेरुवा गांव में मजदूरों की संख्या 60 से बढ़कर 180 हो चुकी है. तेरुवा गांव के ग्राम प्रतिनिधि अखिलेश सिंह ने कहा कि ”बाहर से आने वाले लोग बहुत बढ़ गए हैं इसलिए पहली बार ये लोग मजदूरी कर रहे हैं, जो महानगर में भीख मांगते थे. वरना आज तक ये काम कभी नहीं किए हैं.”

अकेले यूपी के आजमगढ़ में बीते दो महीनों में 70 हजार श्रमिक लौटे हैं. इसी के चलते अब रोज़गार के अलावा जमीन और परिवार संबंधी कई झगड़े भी बढ़ने के आसार हैं. आजमगढ़ में बाकायदा इस तरह का एक आदेश निकालकर ग्राम राजस्व समितियां बनाई गई हैं ताकि रोजी-रोटी के लिए पारिवारिक और ज़मीन के झगड़े न होने पाएं. 

आजमगढ़ के जिलाधिकारी एनपी सिंह ने कहा कि ”श्रमिक बड़ी तादाद में लौट रहे हैं तो विवाद भी बढ़ेंगे. इसलिए ग्राम समितियां विवादों का निपटारा करेंगी.”

हालांकि यूपी सरकार मनरेगा के अलावा महानगरों में औद्योगिक काम करने वाले ट्रेंड वर्करों का पंजीकरण करवा रही है ताकि जिन जिलों में ये लौटे हैं वहीं इनको काम दिया जा सके. लेकिन यूपी और बिहार के उद्योग जब अपने सबसे बुरे दौर में चल रहे हों तो इन श्रमिकों को काम पर लगाना इतना आसान नहीं है.


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here