Millions would have starved if COVID-19 lockdown was not eased: Pak PM |इमरान खान ने कहा यदि Lockdown नहीं हटाते तो PAK में लाखों लोग भूखे मर जाते

इस्लामाबाद: कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते मामलों के बावजूद लॉकडाउन हटाने के फैसले पर चौतरफा घिरे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) अब सफाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों के सामने यह मजबूरी है कि वे अपने लोगों को COVID-19 से बचाएं या भूख से. यदि लॉकडाउन नहीं हटाया गया होता, तो लाखों लोग भूखे मर जाते.  

विश्व आर्थिक मंच को वीडियो लिंक के माध्यम से संबोधित करते हुए इमरान ने कोरोना महामारी के दौर में विकासशील देशों की आर्थिक कमजोरियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, ‘हमें एक दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ा. हमें वायरस के प्रसार को रोकना है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हमारी आबादी और बढ़ती गरीबी पर लॉकडाउन के प्रभावों को कैसे कम किया जाए’.

पाकिस्तान ने एक महीने तक चले लॉकडाउन को 9 मई को हटाने का ऐलान किया था. आर्थिक संकट का हवाला देते हुए इमरान सरकार ने विभिन्न व्यवसायों को खोलने की अनुमति दे दी है. सरकार के इस निर्णय की इसलिए आलोचना हो रही है क्योंकि कोरोना पाकिस्तान में लगातार फैलता जा रहा है. इमरान खान ने आगे कहा, ‘पाकिस्तान में, हमारे पास 25 मिलियन कार्यकर्ता हैं जो या तो दैनिक वेतन भोगी हैं या उनका अपना रोजगार है और ये हमारे लिए 25 मिलियन परिवार हैं. मेरा कहना है कि कोरोना ने कुल मिलाकर 120-150 मिलियन लोगों को प्रभावित किया है’.

काम नहीं करेंगे, तो भूखे मर जाएंगे
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने गरीब परिवारों को नकदी प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया और अब तक 15 मिलियन परिवारों को पैसा मिल चुका है. इन लोगों को गरीबी का सामना करना पड़ रहा है, और यदि ये काम नहीं करेंगे, तो भूखे रह जाएंगे. पैसा उपलब्ध कराना केवल एक अल्पकालिक समाधान है. इसलिए हमें कड़े उपायों में ढील देने का फैसला लेना पड़ा.

लॉकडाउन ने बिगाड़े हाल
खान ने जी -20 देशों द्वारा ऋण राहत के प्रयास का समर्थन करते हुए कहा कि इससे महामारी से लड़ने में मदद मिलेगी. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘जी -20 देशों का ऋण राहत प्रदान करना अच्छा कदम है, लेकिन विकासशील देशों की जरूरतें ज्यादा हैं. इसलिए ऐसे और कदम उठाये जाने चाहिए. पहले से ही कई विकासशील देश कोरोना से मुकाबले में आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और लॉकडाउन जैसे उपायों ने उनकी परेशानियों को बढ़ा दिया है. मैंने नाइजीरिया, इथियोपिया और मिस्र के नेताओं से बात की है और उन्होंने मुझे बताया कि वे निर्यात और राजस्व में गिरावट जैसे मुद्दों का सामना कर रहे थे’.




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