प्रकाश जावड़ेकर बोले- देश कोरोना से लड़ रहा, बेवजह का सवाल उठा रहा विपक्ष – Prakash javdekar attack over opposition meeting coronavirus lockdown

  • गैर-जिम्मेदार विपक्ष बेवजह सवाल उठा रहा
  • विपक्ष केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कोरोना संकट को लेकर हुई विपक्ष की बैठक पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आज देश कोरोना की लड़ाई लड़ रहा है और ये गैर-जिम्मेदार विपक्ष बेवजह सवाल उठा रहा है.

विपक्ष को निशाने पर लेते हुए प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पहले उन्होंने लॉकडाउन पर सवाल उठाया. फिर बाद में कहने लगे कि लॉकडाउन का विस्तार क्यों नहीं किया जा रहा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विपक्ष ने पूरा अध्ययन करने के बाद केंद्र सरकार के वित्तीय पैकेज पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि हम किसानों, प्रवासियों और गरीब तबके की मदद कर रहे हैं. विपक्ष देश में केवल नकारात्मक राजनीति कर रहा है, जिसकी हम निंदा करते हैं.

सोनिया ने आर्थिक पैकेज को बताया मजाक

असल में, देश में कोरोना वायरस और चक्रवाती तूफान अम्फान संकट के बीच शुक्रवार को विपक्षी दलों की बैठक हुई. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में केंद्र सरकार से अम्फान को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की गई. वहीं सोनिया गांधी ने बैठक की शुरुआत करने के साथ ही कोरोना संकट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका लगा है. प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों ने बड़े पैमाने पर राजकोषीय प्रोत्साहन दिए जाने की तत्काल आवश्यकता की सलाह दी थी. प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मई को 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया और फिर वित्त मंत्री अगले पांच दिनों तक उसका विवरण देती रहीं. यह देश के साथ एक क्रूर मजाक था.

बैठक में सोनिया गांधी ने सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कोरोना को 21 दिन में खत्म करने की पीएम का दावा धराशायी हुआ. सरकार के पास लॉकडाउन को लेकर कोई प्लान नहीं था. सरकार के पास करोना संकट से बाहर निकलने की कोई नीति नहीं थी. लगातार लॉकडाउन का कोई फायदा नहीं हुआ, नतीजे खराब ही निकले. कोरोना टेस्ट और पीपीई किट के मोर्चे पर भी सरकार विफल रही. अर्थव्यवस्था चरमरा गई, लॉकडाउन के नाम पर क्रूर मज़ाक हुआ. सारी शक्तियां पीएमओ के पास हैं, वो कर्मचारियों और कंपनियों के हितों की सुरक्षा करें.

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सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत में उम्मीद जताई थी कि इस पर 21 दिन में काबू पा लिया जाएगा, जबकि उनकी धारणा गलत साबित हुई. उन्होंने कहा कि सरकार न केवल लॉकडाउन के मानदंडों को लेकर अनिश्चित थी, बल्कि उसके पास इससे निकलने की भी कोई रणनीति नहीं थी. इस क्रमिक लॉकडाउन के नतीजे भी खास नहीं देखने को मिले.

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सोनिया गांधी ने कहा कि कोरोना टेस्ट और टेस्टिंग किट के आयात पर भी झटका लगा. लॉकडाउन से उपजे संकट पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नकदी गरीबों को हस्तांतरित की जानी चाहिए, सभी परिवारों को मुफ्त अनाज वितरित किया जाना चाहिए, प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों में वापस जाने के लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था करनी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और नियोक्ताओं की सुरक्षा के लिए वेतन सहायता और मजदूरी संरक्षण निधि स्थापित की जानी चाहिए. सोनिया गांधी ने पीएसयू को बेचने को हरी झंडी देने की निंदा की और श्रम कानूनों को बहाल करने की अपील की. उन्होंने कहा कि सारी शक्ति अब एक कार्यालय, पीएमओ में केंद्रित हो गई है. संघवाद की भावना जो हमारे संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे भुला दिया गया है. संसद के दोनों सदनों या स्थायी समितियों को बैठक करने के लिए बुलाया जाएगा या नहीं…इसका कोई संकेत नजर नहीं आता है.

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