- पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज सुरिंदर खन्ना का जन्मदिन
- 1984 के एशिया कप में की थी शानदार बल्लेबाजी
एशिया कप टूर्नामेंट पहली बार अप्रैल 1984 में खेला गया था. सुनील गावस्कर की अगुवाई में भारतीय टीम ने शारजाह में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर शुरुआती एशिया कप पर कब्जा जमाया था. उस टूर्नामेंट में ‘मैन ऑफ द सीरीज’ के साथ भारतीय टीम के अप्रत्याशित सितारे के रूप में सुरेंदर खन्ना उभरे थे, जिन्होंने पांच साल बाद टीम में वापसी की थी. आज दिल्ली के इस पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज का जन्मदिन है. 3 जून को वह 64 साल के हो गए.
दरअसल, 1979 में इंग्लैंड के दौरे के लिए चयनकर्ताओं ने नियमित विकेटकीपर सैयद किरमानी को नहीं चुना था और उनकी जगह सुरिंदर खन्ना को मौका दिया. खन्ना ने कर्नाटक के खिलाफ रणजी ट्रॉफी फाइनल की दोनों पारियों में शतक (111 और 128 रन) जमाकर पहली बार दिल्ली को रणजी चैम्पियन (1978-79) बनाया था. उस रणजी सत्र में उन्होंने जबर्दस्त बल्लेबाजी करते हुए 657 रन बनाए थे और इसी के इनाम के तौर पर उन्हें भारतीय टीम में जगह दी गई थी.
… लेकिन वह मौके का फायदा नहीं उठा पाए. उन्हें इंग्लैंड में खेले गए 1979 के वर्ल्ड कप के दौरान डेब्यू किया, जो भारत के लिए अब तक का सबसे खराब विश्व कप अभियान माना जाता है. भारत ने अपने तीनों मैच गंवाए और सुरिंदर खन्ना (0, 7 और 10 रन) भी नहीं चल पाए. इस वजह से इंग्लैंड के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज में दूसरे नए विकेटकीपर भारत रेड्डी को उतारा गया.
इसके बाद ऐसा लगा कि सुरिंदर खन्ना का करियर खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखा. आखिरकार उनके करियर को एक नया जीवन मिला, जब उन्हें 1984 में किरमानी की जगह एशिया कप के लिए भारतीय टीम में शामिल कर लिया गया.
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— Surinder Khanna (@SurinderKhanna3) May 30, 2020
भारत ने यह एशिया कप टूर्नामेंट एक साल पहले टीम को वर्ल्ड चैम्पियन बनाने वाले कपिल देव के बिना खेला था. वह तब शारजाह में थे, लेकिन उन्हें घुटने के ऑपरेशन के लिए इंग्लैंड जाना था. भारत ने पहले मैच में श्रीलंका को दस विकेट से हराया. मदनलाल, चेतन शर्मा और मनोज प्रभाकर की शानदार गेंदबाजी के आगे श्रीलंकाई टीम 96 रनों पर ढेर हो गई थी. सुरिंदर खन्ना (नाबाद 51) और गुलाम परकार (नाबाद 32) ने टीम को आसान जीत दिला दी.
अगले मैच में भारत का सामना पाकिस्तान से था. भारत ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और निर्धारित 46 ओवरों में चार विकेट पर 188 रन बनाए. सलामी बल्लेबाज खन्ना ने फिर से अपने बल्ले का कमाल दिखाया और 56 रन बनाए. उनके अलावा संदीप पाटिल ने 43 और गावस्कर ने नाबाद 36 रन बनाए. पाकिस्तान की टीम इसके जवाब में 39.4 ओवरों में 134 रनों पर सिमट गई. रोजर बिन्नी और रवि शास्त्री ने तीन-तीन विकेट चटकाए, जबकि चार बल्लेबाज रन आउट हुए थे. टूर्नामेंट में कुल 3 मैच ही खेले गए थे. भारत का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. इस वजह उसे चैम्पियन घोषित कर दिया गया था.
ट्रॉफी उठाए सुरिंदर खन्ना.
एशिया कप (1984) टूर्नामेंट के 3 मैच –
पहला मैच- पाकिस्तान vs श्रीलंका : श्रीलंका 5 विकेट से जीता
दूसरा मैच- भारत vs श्रीलंका : भारत 10 विकेट से जीता
तीसरा मैच- भारत vs पाकिस्तान : भारत 54 रनों से जीता
सुरिंदर खन्ना सितंबर 1984 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार वनडे मैचों की घरेलू सीरीज में असफल रहे, उसी साल पाकिस्तान दौरे के लिए उन्हें टीम में बरकरार रखा गया. क्वेटा में खेले गए तीन मैचों की सीरीज के पहले वनडे में खन्ना ने 31 रन जरूर बनाए, लेकिन भारतीय टीम पाकिस्तान के 199/7 रनों के जवाब में 153 रनों पर सिमट गई थी.
दूसरे वनडे से पहले हैमस्ट्रिंग चोट की वजह से उन्हें अपनी जगह गंवानी पड़ी. स्यालकोट वनडे के लिए किरमानी टीम में आ गए, हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की वजह से वह मैच और दौरा बीच में ही रद्द करना पड़ा. इसके बाद फिर कभी सुरिंदर खन्ना को अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका नहीं मिला.

