नई दिल्ली: संयुक्त राज्य अमेरिका (America) के साथ विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र होने का गौरव भी जुड़ा हुआ है. एक ऐसा देश जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सबसे मजबूत स्तंभों में से एक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब अमेरिकी लोग नस्लीय हत्या के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त करते हैं तो इस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ क्या होता है? इन प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी करार दिया जाता है. ये वही शब्द है जिसे ओसामा बिन लादेन और अबू बक्र अल-बगदादी जैसे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने पूर्व वकील जॉन डाउड के एक पत्र को रीट्वीट किया. यह पत्र ट्रंप के पहले रक्षा सचिव जिम मैटिस को संबोधित किया गया था. इसमें लिखा था- ‘लाफायेते पार्क के पास विरोध प्रदर्शन करने वाले फर्जी लोग न शांतिपूर्ण थे और न वास्तविक. वे आतंकवादी हैं जिन्होंने आगजनी और तबाही के लिए नफरत से भरे छात्रों का इस्तेमाल किया.’
I thought this letter from respected retired Marine and Super Star lawyer, John Dowd, would be of interest to the American People. Read it! pic.twitter.com/I5tjysckZh
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) June 4, 2020
पत्र में ये भी कहा गया कि जब पुलिस 1900 कर्फ्यू की तैयारी कर रही थी तो प्रदर्शनकारी पुलिस को अपमानित कर रहे थे, उन्हें गालियां दे रहे थे. बता दें कि सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के पास पार्क में हिंसक प्रदर्शन किया था. ट्रंप के ट्वीट और रीट्वीट अपने आप में एक कहानी कहते हैं, लेकिन यहां तथ्यों की जांच की गई है. सोमवार के हुए विरोध प्रदर्शन के वीडियो दो चीजें दिखाते हैं- पहली, वहां तनाव था और दूसरी, किसी हिंसा की सूचना नहीं मिली.
हाल ही में देशभर में प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए, जहां आगजनी और लूटपाट की ऐसी कई घटनाएं हुईं जिनकी निंदा करनी ही चाहिए. लेकिन व्हाइट हाउस पार्क के पास सोमवार को किया गया विरोध प्रदर्शन पुलिस के पहुंचने तक इन हिंसक प्रदर्शनों जैसा नहीं था. प्रदर्शनकारियों को रबर की गोलियों से मारा गया, आंसू गैस छोड़ी गई और पत्रकारों पर हमला किया गया. ये सब स्थानीय समय के अनुसार शाम 6 बजकर 30 मिनट पर हुआ, कर्फ्यू लगाने से तीस मिनट पहले. बाइबिल के साथ ट्रंप का लिया हुआ वो फोटो शानदार था. ट्रंप को एक चर्च का दौरा करना था और इसीलिए प्रदर्शनकारियों को पार्क से दूर भगा दिया गया था.
इस हफ्ते की शुरुआत में भी ट्रंप ने आतंक शब्द के संदर्भ में कुछ कहा था. सोमवार को ट्रंप ने कहा था- ‘यहां देश की राजधानी में, लिंकन मेमोरियल और वर्ल्ड वॉर टू मेमोरियल को बर्बाद कर दिया गया. हमारे सबसे ऐतिहासिक चर्चों में से एक को आग लगा दी गई. कैलिफोर्निया में एक संघीय अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इसे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नहीं कहा जा सकता. ये घरेलू आतंक है. निर्दोषों की हत्या करना और उनका खून बहाना मानवीय अपराध है और ईश्वर के खिलाफ किया गया अपराध है.’ बर्बरता को सही नहीं ठहराया जा सकता है और जिन लोगों ने ऐसा किया है, उनपर कार्रवाई करनी चाहिए ठीक उसी तरह जिस तरह जॉर्ज फ्लॉयड के हत्यारों पर की गई. वैसे, प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी कहना भी उचित नहीं है.


