मुंबई: कोरोना से जंग में धारावी ने कायम की मिसाल, लेकिन चुनौती बरकरार – Mumbai dharavi corona control in asia largest slum but challenge continues

  • 1 से 7 जून के बीच धारावी में कोरोना से एक भी मौत नहीं
  • फिलहाल यहां कोरोना केस की डबलिंग रेट 44 दिन की है

एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती धारावी ने पूरे देश के सामने कोरोना के खिलाफ एक मिसाल कायम की है. धारावी में कोरोना का केस समाने आने के बाद आशंका थी कि यहां पर संक्रमण रोकना बेहद मुश्किल होगा. लेकिन 1 जून के बाद से धारावी में कोरोना केसों की संख्या काफी कम हो गई है. 1 जून से 7 जून के बीच धारावी में कोरोना वायरस के कारण एक भी मौत नहीं हुई.

धारावी में कोरोना नियंत्रण का काम आसान नहीं था. यह बड़े पैमाने पर मिशन चलाया गया जिसमें बीएमसी, पुलिस, चिकित्सा कर्मचारी, वार्ड बॉय, गैर सरकारी संगठन, सफाई कर्मचारी आदि सच्चे कोरोना योद्धा शामिल हुए.

फिलहाल धारावी में कोरोना केस के दोगुने होने की दर यानी डबलिंग रेट 44 दिन की है. धारावी में अब तक कोरोना वायरस के केसों की कुल संख्या 1964 है और 73 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 939 से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं. यह आंकड़ा 10 जून तक का है. हालांकि, धारावी में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.

धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी-बस्ती है. यह 2.5 वर्ग किमी में फैली है और यहां का जनसंख्या घनत्व 227,136 प्रति वर्ग किलोमीटर है. धारावी चमड़े, मिट्टी के बर्तनों और कपड़ों के विभिन्न छोटे-छोटे उद्यमों का गढ़ है. यह मुंबई की सबसे बड़ी अनियोजित बस्ती है. गलियां इतनी संकरी और क्षेत्रफल इतना बड़ा है कि अगर कोई अनजान व्यक्ति इन गलियों में प्रवेश कर जाए तो उसके लिए बस्ती से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.

धारावी के पुनर्वास की बातें कई सालों से चल रही हैं. बिल्डरों की लॉबी धारावी पर पहले से ही नजर गड़ाए हुए हैं, क्योंकि यह मुंबई शहर के बीच में स्थित है.

धारावी में कोरोना का पहला केस

कोरोना वायरस के चलते लागू हुए लॉकडाउन के दस दिन में ही मुंबई के अधिकारियों का डर सामने आ गया था. धारावी में पहला जो मामला सामने आया, वह कोरोना के चलते मौत का मामला था. लॉकडाउन के दौरान भी धारावी की गलियों में लोग देखे जा सकते थे.

दरअसल, धारावी जैसी बस्ती में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवा पाना संभव नहीं था. छोटे-छोटे कमरों में 7 से 8 लोग तक रहते हैं. उसी छोटे से कमरे में वे खाना बनाते हैं, खाते हैं और सोते हैं. अधिकारियों के लिए सबसे डरावना दिन 4 अप्रैल को आया, जब धारावी में पहला केस दर्ज हुआ.

इसके बाद धारावी अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गई, क्योंकि यहां कोरोना के मामले नियंत्रित नहीं किए जाते तो तबाही ​की स्थिति होती और बड़े पैमाने पर जानें जातीं.

अधिकारियों ने धारावी के लिए बाकायदा प्रोटोकॉल बनाए. ग्राउंड पर मिशन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति थे किरण दिघावकर, जो कि बीएमसी के सहायक नगर आयुक्त हैं.

दिघावकर कहते हैं, “हमारी प्राथमिकता थी आक्रामक स्क्रीनिंग और टेस्टिंग. घर-घर जाकर लोगों की ​स्क्रीनिंगग करना और जांच करना. कई क्लिीनिक वालों ने अपने क्लिीनिक बंद कर दिए, जिससे डर का माहौल बन गया. हमने कई छोटे क्लीनिकों खुलवाए. शुरुआती स्तर पर पता लगाना, संदिग्ध लोगों को सही समय पर अलग थलग करना हमारी प्राथमिकता थी. इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण था शौचालयों की सफाई और कीटाणुनाशक का छिड़काव, क्योंकि यहां पर अधिकांश लोग सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते हैं.”

टॉयलेट से सैनिटाइजर की चोरी

टॉयलेट से सैनिटाइजर की चोरी की भी चुनौती सामने आई. धारावी में 225 सामुदायिक शौचालय, 100 सार्वजनिक शौचालय और 125 म्हाडा शौचालय (MHADA) हैं.

इन शौचालयों का लाखों लोग इस्तेमाल करते हैं. यहां सार्वजनिक शौचालय के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है और इन शौचालयों के जरिये संक्रमण का सबसे बड़ा डर था. इसलिए इन शौचालयों की दिन में दो बार नियमित सफाई शुरू की गई. जगह जगह पोस्टर लगाए गए और सभी शौचालयों में सैनिटाइजर रखे गए. अधिकारियों का कहना है कि सैनिटाइजर रखने के कुछ ही देर बाद सभी जगहों के सैनिटाइजर चोरी हो गए.

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एक अधिकारी ने कहा, “यहां तक कि सभी हैंड सैनिटाइजर चोरी हो गए तो इससे हम खुश थे कि उनका उपयोग अच्छे उद्देश्य के लिए किया जाएगा. इसके बाद हमने ऐसा सैनिटाइजर रखने का फैसला किया जिसे हटाया नहीं जा सकता. इसमें थोड़ा समय लगा, लेकिन अब अधिकांश टॉयलेट में ऐसे सैनिटाइजर पॉट लगे हैं जिन्हें हटाया नहीं जा सकता.”

2750 कोरोना वॉरियर्स

धारावी में कोरोना से निपटने के लिए अधिकारियों की भारी भरकम टीम तैनात की गई, जो चौबीसों घंटे काम कर रही है. इनमें डॉक्टरों, इंजीनियरों, सफाईकर्मियों, नर्सों, वार्ड बॉय को मिलाकर 2750 कोरोना योद्धाओं की टीम है. इसके अलावा बाहर से विभिन्न सेक्टरों से 1200 लोग बुलाए गए थे. इन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया था.

पूरी बस्ती में 13 हाई रिस्क जोन चिन्हित किए गए. इन इलाकों को सील करना बेहद मुश्किल था. लेकिन इन इलाकों में किसी को निकले बिना खाना, पानी, किराना का सामान, दवाएं आदि की उपलब्धता सुनिश्चित की गई. माटुंगा लेबर कैंप, कुंभरवाड़ा, मुकुंद नगर, राजीव गांधी नगर, वाल्मिीकि नगर और ट्रांजिट कैंप जैसे इलाकों में सबसे ज्यादा केस थे. 39 केस तो सिर्फ धारावी पुलिस स्टेशन में थे. धारावी का कुछ इलाका शाहूनगर थाने के अंतर्गत आता है. इस थाने के एक युवा पुलिस अधिकारी ने अपनी जान भी गवां दी.

सिर्फ पुलिसकर्मी ही नहीं, बीएमसी के अधिकारी और एनजीओ कर्मी भी संक्रमित हुए. फूड सप्लाई की जिम्मेदारी संभाल रहे एक बीएमसी अधिकारी की भी मौत हो गई.

लॉकडाउन में ढील के बावजूद कई क्लिीनिक अब भी बंद हैं. साई अस्पताल, आयुष अस्पताल, लाइफ केयर अस्पताल, फेमिली केयर अस्पताल और प्रभात नर्सिंग होम को इलाज के लिए निर्देशित किया गया है.

एसिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर दिघावकर ने कहा, “धारावी में सोशल डिस्टेंसिंग संभव नहीं है. यहां कोई खुली जगह नहीं है. इसलिए राजीव गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, माहिम नेचर पार्क, म्युनिसिपल ​स्कूल समेत कई विद्यालयों और हॉस्टल में क्वारनटीन सेंटर बनाया गया है. धारावी के सभी होटल और लॉज सरकार ने कब्जे में ले लिया है.”

प्रवासी मजदूरों का पलायन

फिलहाल धारावी की गलियां खाली दिखती हैं क्योंकि अधिकांश प्रवासी कामगार वहां से जा चुके हैं. आधिकारिक तौर पर 2 लाख से अधिक मजदूरों ने धारावी छोड़ दिया है और ट्रेनों या बसों के जरिये अपने गांवों को लौट गए हैं. तमाम लोग ऐसे भी पलायन कर गए जिनका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं है. कपड़े के सभी उद्योग फिलहाल बंद पड़े हैं.

17 लाख खाने के पैकेट बांटे गए

धारावी में प्रशासन की ओर से अब तक परिवारों को 25 हजार से अधिक किराना किट वितरित किए गए हैं. अब तक 17 लाख से ज्यादा खाने के पैकेट बांटे गए हैं. पहले रोजाना 21 हजार फूड पैकेट बांटे जा रहे थे, अब यह संख्या घट गई है. अब हर दिन 7 हजार फूड पैकेट बांटे जा रहे हैं. रमजान के महीने में हर दिन 11 हजार इफ्तारी पैकेट भी बंटवाए गए.

अब धारावी से अच्छी खबरें आ रही हैं. कोरोना से लड़ने में धारावी देश की अन्य जगहों के लिए मार्गदर्शन का काम कर सकती है, लेकिन लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. असली जीत तब होगी, जब धारावी में कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आएगा.




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