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शिव के राज का दुश्मन कौन… बीजेपी में ही कोई विभीषण तो नहीं?

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शिव के राज का दुश्मन कौन… बीजेपी में ही कोई विभीषण तो नहीं?


खबर की खबर / धीरज चतुर्वेदी


याद करें सिंधिया के बागी होने ओर बीजेपी का हाथ में फूल थामने के बाद सम्मान के मंच पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें विभीषण शब्द से सम्मानित कर दिया था। आज विभीषण कोई दूसरा है ओर विवादों के घेरे में शिव का राज है। मप्र सहित देश कि राजनीती में भूचाल लाने वाले शिवराज के एक बयान से कई सवाल सामने आ रहे है।

बीजेपी में आखिर शिवराज का दुश्मन कौन? जिसने राज्यसभा चुनाव के ठीक पहले बागियों के दागी ओर पार्टी हाईकमान कि साजिश करने वाले वीडियो को दुश्मन पार्टी को थमा दिया। वहीँ अब कांग्रेस कि सरकार गिरने में खरीद फरोख्त के अंदेशे को मुहर लगाते कानूनी दरवाजे खोल दिये।


मप्र में भीषण तपन के दौर में सियासी लू के थपेड़े गर्माहाट से बेचैन किये है। बेचैन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है जिनका एक वीडियो वायरल हुआ है। जो बीती 8 जून को मुख्यमंत्री के इंदौर दौरे के दौरान के बताये जा रहे है। हालांकि मुख्यमंत्री का दौरा मूलतः कोरोना वायरस से इंदौर के बिगड़ते हालातो को लेकर था। जहाँ उन्होंने अधिकारियो के साथ बैठके भी कि, लेकिन राजनैतिक दल का कोई नेता संकट के समय भी दौरे पर हो ओर सियासत कि बिसात ना बिछाये, यह नामुमकिन है। चूकि कांग्रेस के बागियों के फूल थामने से कांग्रेस सरकार कि पटखनी के बाद मध्यप्रदेश में उपचुनाव का बिगुल फूंका हुआ है। इनमे से ही एक सीट इंदौर जिले के सांवेर की है। इस कारण इंदौर कि रेसीडेंसी कोठी में शिवराज सिंह चौहान ने सांवेर विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओ को सम्बोधित किया।

मुख्यमंत्री भाषण दे रहे थे ओर कार्यकर्त्ता तालियां पीट रहे थे। अचानक अति उत्साह में शिवराज सिंह ने वो बात कह डाली जो पर्दे में ढकी हुई थी। कांग्रेस सरकार गिराने में बीजेपी कि ही भूमिका के रहस्य से जैसे ही पर्दा हटा तो पूरा भेद खुल गया ओर वो भी शिवराज कि जुबान से। वीडियो में शिवराज कहते दिखाई दे रहे है कि “केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया कि सरकार गिरनी चाहिये। शिवराज उपस्थित कार्यकर्ताओ से पूछ रहे कि क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया ओर तुलसी सिलावट के बिना सरकार गिर सकती थी क्या? कार्यकर्ता कहते है नहीं। फिर शिवराज सिंह कहते है कि कोई ओर तरीका नहीं था।

यही शब्द अब मुख्य्मंत्री शिवराज कि गले कि फ़ांस बन गये है। सरकार गिरने के बाद कांग्रेस के नेता यही दोहराते रहे कि बीजेपी कि खरीद फरोख्त के कारण कांग्रेस कि सरकार को साजिश के तहत गिराया गया है। वहीँ बीजेपी के नेता उनके दल कि साजिश होने से इंकार करते रहे। जब मुख्य्मंत्री ने केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर कांग्रेस सरकार गिराने के सच को उगल दिया है तो हंगामा मचा हुआ है।

कांग्रेस इन बयानों को परमाणु बम मानते हुए बीजेपी पर हमलावर हो गई है। पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने तो कानूनी सलाह लेने के बाद अदालत के रास्ते जाने तक कि बात कह दी है। वहीँ बीजेपी के प्रवक्ता इसे हास्य उपहास में कहीं बात कह रहे है। बीजेपी नेताओं कि सफाई कि दलीले भी खुद उपहास ओर हास्यप्रद हो रही है, क्योंकि ऊँगली बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के चरित्र पर उठी है। जिसे कटघरे में खड़ा करने वाला कोई विपक्ष नहीं ही बल्कि उनकी ही पार्टी का वह जिम्मेदार नेता है जिसे कांग्रेस सरकार गिरने के बाद मप्र का मुख्यमंत्री बनाया गया है।

कांग्रेस के लिये कानूनी तोर पर मुख्यमंत्री का बयान एक सक्षम साक्ष्य है। वीडियो वायरल हुआ तो आखिर क्यो ओर कैसे। बड़ा सवाल यही है। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर सांवेर के कार्यकर्ताओ को मुख्यमंत्री ने सम्बोधित किया, वहां मीडिया का प्रवेश निषेध था। यह तय है कि मुख्यमंत्री के भाषण को स्ट्रिंग करने वाला कोई बाहरी नहीं अपना था। वायरल वीडियो को ध्यान से देखे तो कार्यकर्ताओ कि बैठक में भाषण स्थान से कुर्सियों कि पाँचवी पंक्ति में भेदिया बैठा था जो अपने भाषण रिकॉर्ड कर रहा था। आखिर वो कौन था ओर किसके इशारे पर काम कर रहा था, यह राजनैतिक पंडितो के बीच मंथन चल रहा है। सियासी गणित को समझने वाले कुछ लोग इसे सिंधिया कि बीजेपी में शरण से खफा लोगो से जोड़ रहे है।

आंकलन कर्ताओ का मत है कि सिंधिया के बीजेपी में आने से कई नेताओं कि सियासी पारी खतरे में है। इस कारण इस कारण सिंधिया कि विश्वसनीयता पर चोट पहुंचने से वह फिर कोई रूप बदल सकते है। चर्चाये भी है कि सिंधिया ओर बीजेपी के बीच अंदरूनी तोर पर कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। सियासी गणित समझने वाले कुछ का मत है कि शिवराज के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही वो रुष्ट है जो मुख्यमंत्री दौड़ में अपना पलड़ा भारी मान रहे थे। मुख्यमंत्री पद से हाथ धोने के बाद मंत्रिमंडल में अपनों को स्थान दिलाना भी एक कारण हो सकता है। ज्ञात हो कि बीजेपी में कांग्रेस के बागियों के कारण बीजेपी के कई दिग्गजों का मंत्रिमंडल में शामिल होने पर भी संशय है। मंत्रिमंडल के विस्तार ना होने के पीछे भी राज माना जा रहा है कि अगर दिग्गजों को स्थान नहीं मिलता है तो बीजेपी में भी बगावत हो सकती है।

राजनैतिक जानकारों के अपने अपने मत है पर यह अवश्य है कि मुख्यमंत्री कि वायरल वीडियो ने एक तीर से कई निशाने भेद दिये है। केंद्रीय नेतृत्व यानि सीधे गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के दामन पर कालिख पुती है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदीजी कि विश्वसनीयता पर भी प्रहार है, जिसे विपक्षी कांग्रेस मुख्य अस्त्र बना रही है। एक ओर विश्लेषण सामने आया है कि मप्र बीजेपी में अंदरूनी खटपट का माहौल है ओर एक लॉबी सक्रिय है जो शिवराज को सिहासन से उचकाना चाहती है। तभी अपनों यानि जयचंद यानि विभीषण से वायरल वीडियो ने बीजेपी के घर में आग लगा दी है।

सत्ता बनाने के लिये शिवराज ने अपने कार्यकर्ताओ को भोपाल में सम्पन्न बैठक में सिंधिया को विभीषण बताते हुए कहा था कि सिंधिया अब हमारे साथ है। अब शिवराज को बीजेपी के विभीषणों कि खोज करनी होंगी जिन्होंने सत्ता गिराने कि साजिश रचने वाले बयान का वीडियो वायरल किया ओर कांग्रेस को सौपा है।

  के के मिश्रा, प्रवक्ता मप्र कांग्रेस

कथित और कूटरचित ऑडियो को मुख्यमंत्री के नाम से चलाना और प्रचारित करना कांग्रेस के “डर्टी ट्रिक्स डिपार्टमेन्ट” की उपज है जो कि घृणित और निंदनीय हरकत है। हम इसके विरुद्ध कार्यवाही करेंगे और कांग्रेस को इसका कठोर जवाब देंगे।

  डॉ हितेष वाजपेयी, मप्र बीजेपी

धीरज चतुर्वेदी

वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार

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