- गलवान घाटी सबसे विवादित स्थलों में से एक
- साफ तौर पर सीमांकित नहीं है भारत-चीन सीमा
चार दिन की कड़ी मेहनत, कई एडिटोरियल टीम्स और विशेष टीम्स से समन्वय के बाद इंडिया टुडे ओपन सोर्स इंटेलीजेंस टीम (OSINT) को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर असल में क्या हो रहा है, इसका व्यापक ब्यौरा सामने लाने में कामयाबी मिली है.
अधिकतर लोग इस बात को लेकर भरमाए हुए हैं कि भारत-चीन सीमा पर आमने-सामने वाली स्थिति के दौरान असल में हो क्या रहा है. ऐसे में हम खासा वक्त, ऊर्जा और कोशिशों के साथ ज़मीनी स्थिति की हक़ीक़त अपने दर्शकों और पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.
पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच मौजूदा गतिरोध 1962 के बाद से सबसे बड़ा सैन्य बिल्ड अप है, इसलिए पूरा मसला समझने के लिए इसे गहराई से खंगालना जरूरी है.
इंडिया टुडे की ओर से बनाए गए ताजा नक्शे गलवान घाटी पर बारीक नजर डालते हैं. गलवान घाटी सबसे विवादित स्थलों में से एक है, जहां भारतीय और चीनी सैनिकों का आमना-सामना हुआ. नक्शे में गलवान घाटी, इसके आसपास की चोटियाँ और बीच में घाटी दिखाई देती है.

हमारी कार्टोग्राफिकल जांच ने उस अहम सड़क की पहचान की जिसका निर्माण दौलत बेग ओल्डी तक किया है जो दुनिया के सबसे ऊंचे एयरफील्ड्स में से एक है.

इसके अलावा, नक्शे कुछ ऐसी लोकेशन्स को दिखाते हैं जहां भारतीय सेना और चीनी सेना (PLA) की चौकियां, यूनिट्स और शिविर हैं.

पैंगोंग त्सो में टकराव पर नक्शे में विवादित झील इलाका और आठ “फिंगर्स” को दिखाया गया है.

जितना हमने सोचा था, ये कवायद उससे कहीं पेचीदा साबित हुई. क्योंकि जानकारी बहुत संक्षिप्त थी. साथ ही भारत-चीन सीमा साफ तौर पर सीमांकित भी नहीं है. जबकि भारतीय सेना के पास पेशेवर सैन्य नक्शे हैं, लेकिन उसकी बहुत कम जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है.
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