नई दिल्ली: चीन के साथ रिश्तों के लेकर अमेरिका में मंथन का दौर जारी है. अमेरिकी विदेशी मंत्री माइक पोम्पियो ने अब चीन के लिए नया रास्ता अख्तियार करने का संकेत दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि चीन के मामले में अमेरिका की पुरानी नीति कारगर साबित नहीं हुई.
एक इंटरव्यू में पोम्पियो ने माना है कि अमेरिका ने चीन में आर्थिक खुलापन को बढ़ावा दिया ताकि राजनीतिक स्वतंत्रता के साथ चीन के लोगों को मूलभूत अधिकार मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने पिछली सरकारों के फैसले की आलोचना नही की लेकिन साफ कर दिया कि अब चीन के मामले में नई नीति अपनाने की जरूरत है.
माइक पोम्पियो ने इस मामले में राष्ट्रपति ट्रंप को पिछले राष्ट्रपतियों से अलग बताते हुए दावा किया कि वो चीन के मामले में एक अलग रास्ते पर चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, पिछले राष्ट्रपतियों ने चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को बढ़ा दिया लेकिन उससे अमेरिकी मध्य वर्ग को नौकरियां गंवानी पड़ी. इससे ना सिर्फ अमेरिका को आर्थिक क्षति हुई बल्कि खुद चीन के अंदर भी लोगों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं हुआ है.
माइक पोम्पियो ने हांगकांग का जिक्र करते हुए कहा कि नैशनल सिक्योरिटी कानून सेस लोगों की आजादी छीन ली गई है. इंटरव्यू के दौरान सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने जोर देकर कहा कि अमेरिका बेशक चीनी लोगों को कामयाब देखना चाहता है, उनको अच्छी जिन्दगी देना चाहता है, लेकिन वहां की कम्यूनिस्ट सरकार अपने ही लोगों के साथ बुरा बर्ताव कर रही है.
पोम्पियो ने चीन में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले खराब बर्ताव का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक अमेरिका चीन में जबरन नसबंदी और गर्भपात की शिकायतों पर गौर करते हुए, कूटनीतिक तौर पर जो हो सकता है वो कर रहा है. चीन के चेताते हुए पोम्पियो ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी हरकत करने वालों की जिम्मेदारी तय होगी.
इस मामले में उन्होंने अमेरिकी सरकार का नजरिया भी बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका पहले चीन को नोटिस पर लाना चाहता है. चीन में मूलभूत अधिकारों के हनन को लेकर विदेश मंत्री ने अमेरिकी कंपनियों और उद्योगपतियों को भी नसीहत दी है. पोम्पियो के मुताबिक हर अमेरिकी कंपनी को अपना फैसला लेने का हक है, लेकिन उनको मुनाफे के साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा और शिष्टता के बारे में भी सोचना होगा.
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अमेरिकी कंपनियों को साफ संकेत देते हुए अमेरिकी नौकरशाह ने साफ कर दिया कि अमेरिका जिन बातों की चिन्ता करता है, उसे मानते हुए कोई कंपनी चीनी सरकार का साथ नहीं दे सकती और ना अमेरिकी सरकार इसकी इजाजत देगी.

