coronavirus treatment drug: Coronavirus Treatment : कोरोनो वायरस से ग्रसित मरीजों को मिलेगी राहत, इस दवा के इस्तेमाल की मिल गई इजाजत – covid 19 biocon drug itolizumab gets approval for coronavirus treatment

Edited By Somendra Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को लेकर दुनियाभर में हाहाकार मचा है। स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा असर करने वाला यह वायरस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है। जिसकी वजह से सांस लेने में तकलीफ होती है और सर्दी, जुकाम जैसे लक्षण दिखते हैं। हालांकि इसके इलाज के लिए कई अलग-अलग विकल्पों की मदद ली जा रही है। इसके इलाज में एक खास दवा के उपयोग किए जाने की बात कही जा रही थी और अब कोरोना वायरस से ग्रसित मरीजों के लिए यह राहत भरी खबर आई है। कोरोना वायरस के इलाज में ऐसी दवा को मंजूरी मिल गयी है, जिससे मरीजों को ठीक करने में काफी मदद मिलेगी।

बायोकॉन निर्मित

है वो खास दवा



कोरोना वायरस के इलाज के लिए जिस दवा के प्रयोग की मंजूरी मिली है दरअसल उसका नाम अल्जूमैब है। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित इस दवा के प्रयोग को ड्रग्स क्ंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिये ‘अल्जूमैब’ (itolizumab ) नाम के मोनोक्लीनिकिल एंटीबॉडी को क्लीनिकल ट्रायल के बाद सीमित प्रयोग को मंजूरी दी है। संभवतः इससे रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ेगी।

इसके पहले अल्जूमैब का इस्तेमाल पुरानी प्लेक सोरायसिस के मरीजों पर किया जाता रहा है। हालांकि, इस बार इसका प्रयाोग सीमित आपातकाल में ही किया जाएगा। मेसर्स बायोकॉन निर्मित इस अल्जूमैब को साल 2013 से ‘प्लेक सोरायसिस’ के रोगियों के इलाज के लिए बनाया जा रहा है। अब इस स्वदेशी दवा को कोविड-19 के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। मेसर्स ने कोविड के मरीजों पर इस दवा के ट्रायल के परिणाम डीजीसीआई के समक्ष प्रस्तुत किया था।



डीसीजीआई ने इसलिए दी मंजूरी

भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI -Drug Controller General of India) ने सारे नमूनों की जांच-पड़ताल के बाद यह तय किया है कि कोविड से संक्रमित वैसे मरीज जिनके स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा है, उन्हें ही अल्जूमैब प्रयोग करने की अनुमति होगी। संक्रमण से जिनकी श्वांस संबंधी समस्याएं ज्यादा हों, उनके ‘साइटोकिन रिलीज सिंड्रोम’ के उपचार के लिए सिर्फ अस्पताल में ही इसका सेवन करने की अनुमति होगी। प्रयोग के पहले मरीज की सहमति भी जरूरी होगी। इसके साथ-साथ इससे होने नुकसान या जोखिम के लिए पहले से तैयार रहना पड़ेगा लेकिन उसकी आशंका न के बराबर है।

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इस दवा से मरीजों के स्वास्थ्य में बेहतरी के संकेत मिले तो भारत के लिये बड़ी उप्लब्धी होगी। इतना ही नहीं, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत का यौगदान सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। फिलहाल इस एंटीबॉडी का प्रयोग सिर्फ मध्यम से तीव्र कोरोना के लक्षणों के मरीजों पर ही किया जाएगा। इस वायरस का प्रकोप छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों के अलावा उन लोगों पर भी दिखता है जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसलिए कोरोना से दूरी बनाए रखने के लिए साफ-सफाई को लेकर ज्यादा जागरूक रहने की हिदायत दी जाती है। संक्रमण से बचे रहने के लिए मास्क जरूर पहनें और सभी सेफ्टी टिप्स को फॉलो करें।

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